एशियाई बाजारों में दिखी बढ़त
एशियाई बाजारों में मंगलवार को तेजी रही, जापान का बेंचमार्क सूचकांक पहली बार प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण 50,000 के स्तर के करीब पहुंच गया क्योंकि रूढ़िवादी सांसद साने ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री चुना गया। टोक्यो में निक्केई 225 0.8 प्रतिशत बढ़कर 49,595.72 पर पहुंच गया क्योंकि जापानी सांसदों ने ताकाइची को चुना। उम्मीद है कि वह कम ब्याज दरों और अधिक सरकारी खर्च जैसी बाजार-अनुकूल नीतियों का समर्थन करेंगी, हालाँकि उनकी गठबंधन सरकार को संसद में बमुश्किल ही बहुमत प्राप्त है।
अमेरिकी डॉलर 150.75 येन से बढ़कर 151.05 जापानी येन हो गया। अगर ताकाइची बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि को धीमा करने में सफल हो जाती हैं, तो डॉलर के मुकाबले येन अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना है। इससे बैंक के मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के प्रयासों में बाधा आएगी, जो अभी लगभग 2 प्रतिशत की अपनी लक्षित दर से ऊपर है। हांगकांग का हैंग सेंग 1.7 प्रतिशत बढ़कर 26,286.47 पर और शंघाई कंपोजिट सूचकांक 1.2 प्रतिशत बढ़कर 3,910.13 पर पहुँच गया।
इस महीने के अंत में एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात की उम्मीदों ने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार तनाव कम होने की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
अमेरिका : ट्रांस-शिपमेंट टैरिफ भारत व आसियान देशों की कंपनियों के लिए अनुपालन से जुड़ी चुनौती, मूडीज का दावा
अमेरिका की ओर से ट्रांस-शिपमेंट माल पर लगाए गए 40 प्रतिशत टैरिफ से भारत और आसियान क्षेत्र की कंपनियों को गंभीर अनुपालन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मूडीज रेटिंग्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यह नीति मशीनरी, विद्युत उपकरण और सेमीकंडक्टर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 31 जुलाई को ट्रांस-शिपमेंट श्रेणी में आने वाले माल पर 40% शुल्क लगाने की घोषणा की थी। यह टैरिफ पारंपरिक द्विपक्षीय शुल्कों से अलग है और विशेष रूप से उन उत्पादों को लक्षित करता है जो चीन से कम टैरिफ वाले तीसरे देशों के माध्यम से अमेरिका भेजे जाते हैं।
मूडीज की 'ट्रेड-एशिया पैसिफिक' रिपोर्ट के अनुसार, यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन ट्रांस-शिपमेंट की परिभाषा कैसे तय करेगा। यदि परिभाषा संकीर्ण रखी जाती है-जैसे केवल पुनः लेबल किए गए या न्यूनतम रूप से संसाधित चीनी उत्पादों को लक्षित किया जाए-तो आर्थिक प्रभाव सीमित रह सकता है। लेकिन यदि अमेरिका व्यापक और दंडात्मक व्याख्या अपनाता है, जिसमें किसी भी चीनी इनपुट वाले उत्पाद को उल्लंघन माना जाए, तो यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आपूर्ति 'शृंखला को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
मूडीज ने यह भी कहा कि इस टैरिफ के चलते आसियान देशों के निजी क्षेत्र को अनुपालन के लिए अधिक परिश्रम और प्रमाणन की आवश्यकता होगी। कंपनियों को अमेरिकी दंड से बचने के लिए अपने निर्यात मॉडल में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।
विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि भारत, आसियान और मैक्सिको के कुछ विशिष्ट क्षेत्र-जैसे मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण और कंज्यूमर ऑप्टिकल उत्पाद (जिसमें सेमीकंडक्टर शामिल हैं)-इस नीति से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।