उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बताया है कि भारत इस सप्ताह स्विट्जरलैंड के जिनेवा में पैलेस डेस नेशंस में उपभोक्ता संरक्षण कानून और नीति पर अंतरसरकारी विशेषज्ञ समूह के नौवें सत्र की अध्यक्षता करेगा। यह सत्र संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (UNCTAD) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसमें सदस्य देश, अंतरराष्ट्रीय संगठन और अन्य हितधारक उपभोक्ता संरक्षण के उभरते मुद्दों पर चर्चा करेंगे। रविवार को जारी बयान के मुताबिक उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे 6 से 8 जुलाई तक जिनेवा में तीन दिवसीय चर्चाओं की अध्यक्षता करेंगी। सत्र में संयुक्त राष्ट्र उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा सिद्धांतों का शुभारंभ होगा, जिसे दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनाया था। एजेंडे में उपभोक्ता सूचना, शिक्षा, सतत खपत और सीमा-पार उपभोक्ता विवादों पर चर्चा भी शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) ने पिछले 14 महीनों में 36 क्षेत्रों में 91.77 करोड़ रुपये से अधिक की वापसी सुनिश्चित की है। भारत की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की उसकी प्रतिबद्धता दर्शाती है।
50,000 पूर्व सैनिकों को प्रशिक्षित करेगा भारतीय बायोगैस एसोसिएशन
इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (IBA) ने आर्मी वेलफेयर प्लेसमेंट ऑर्गेनाइजेशन (AWPO) और रेवेले एनर्जी एलएलपी के साथ 50,000 पूर्व सैन्य कर्मियों को नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित करने का प्रारंभिक समझौता किया है। यह साझेदारी पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार और स्थायी कॅरिअर के अवसर पैदा करेगी। समझौते का लक्ष्य बायोएनर्जी इकोसिस्टम में कौशल मांग-आपूर्ति के अंतर को पाटना है। AWPO देश भर से उपयुक्त पूर्व सैनिकों को जुटाएगा और उनकी स्क्रीनिंग करेगा। IBA उद्योग संबंध, ऑनसाइट प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सहायता प्रदान करेगा। रेवेले एनर्जी एलएलपी नीतिगत वकालत और रणनीतिक समन्वय में सहयोग करेगा। IBA के अध्यक्ष गौरव केडिया ने कहा कि कुशल जनशक्ति देश के स्थिरता लक्ष्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 25,000 से 50,000 सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को लक्षित किया जाएगा। AWPO के प्रबंध निदेशक मेजर जनरल एएस चौहान ने इस सहयोग को राष्ट्रीय सेवा और सतत विकास का शक्तिशाली संगम बताया।
केंद्र ने गैस आपूर्ति संबंधी आपात पाबंदियां हटाईं
पश्चिम एशिया में युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति फिर शुरू होने के बाद केंद्र सरकार ने एलएनजी आपूर्ति को लेकर लागू ज्यादातर आपातकालीन प्रतिबंध वापस ले लिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 के कई प्रमुख प्रावधानों को हटा दिया।
सरकार ने यह आदेश 9 मार्च को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी किया था। उस समय संघर्ष के कारण होर्मुज जलमार्ग से एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित थी। कई आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर लागू कर गैस खेप का रुख बदल दिया था, जिससे भारत में गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आपात कदम उठाने पड़े थे। आपात व्यवस्था के तहत पाइप से मिलने वाली घरेलू गैस (पीएनजी), परिवहन के लिए सीएनजी, एलपीजी उत्पादन को छह महीने की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था। उर्वरक संयंत्रों को 70 प्रतिशत और औद्योगिक उपभोक्ताओं को 80 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी। इसके लिए पेट्रोकेमिकल इकाइयों, बिजली संयंत्रों और रिफाइनरियों की गैस खपत में कटौती की गई थी।
सामान्य होगी आपूर्ति: मंत्रालय ने कहा, होर्मुज से समुद्री मार्ग बहाल होने के कारण अब आपात प्रावधानों की जरूरत नहीं रही। इसी वजह से मार्च में लागू प्राथमिकता आधारित गैस आवंटन व्यवस्था समाप्त की जा रही है। इससे गैस आपूर्ति सामान्य होगी।
टीवी चैनलों की रेटिंग पर भी रोक, नए नियमों के तहत पंजीकरण के बिना रेटिंग तैयार नहीं कर सकतीं एजेंसियां
केंद्र सरकार ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) को नए टेलीविजन रेटिंग्स नियम-2026 के तहत पंजीकरण पूरा होने तक न्यूज और गैर-न्यूज सभी टीवी चैनलों की रेटिंग प्रकाशित करने से रोक दिया है। इससे पहले सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान 6 मार्च को न्यूज चैनलों की रेटिंग पर रोक लगा दी थी। अब खेल और मनोरंजन समेत टीवी चैनलों की रेटिंग पर रोक लगा दी गई है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि पहले केवल न्यूज चैनलों की रेटिंग पर रोक थी, लेकिन अब यह सभी श्रेणियों के चैनलों पर लागू होगी। मार्च में लागू नई नीति ने 2014 की पुरानी व्यवस्था की जगह ली है। बार्क देश की एकमात्र टीवी ऑडियंस मापन एजेंसी है, जिसके साप्ताहिक दर्शक आंकड़े विज्ञापन, मीडिया प्लानिंग व कार्यक्रमों के मूल्यांकन का प्रमुख आधार माने जाते हैं। मंत्रालय के अनुसार, टेलीविजन रेटिंग्स नियम की धारा 14.2 के तहत कोई भी रेटिंग एजेंसी नए नियमों के अनुरूप पंजीकरण और लाइसेंस प्राप्त किए बिना टीवी रेटिंग तैयार या प्रकाशित नहीं कर सकती। नई नीति में लैंडिंग पेज के दर्शकों की संख्या को टेलीविजन रेटिंग से बाहर रखा गया है। रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की जरूरत 20 करोड़ रुपये से घटकर 5 करोड़ कर दी गई है। प्रवेश मानदंडों में भी ढील दी गई है। इससे दर्शक प्रबंधन व्यवसाय में कई कंपनियों के लिए रास्ता खुल गया है।