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Economy: कारोबारी गतिविधियां अप्रैल में 14 साल के शीर्ष पर, नौकरियों में वृद्धि को मिला समर्थन

Wed, 24 Apr 2024 05:11 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीएमआई से पता चलता है कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में विस्तार का संकेत है। महंगाई में कमी के बावजूद रेपो दर में कटौती में देरी हो सकती है क्योंकि महंगाई में आगे बहुत गिरावट की संभावना नहीं है।
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भारत की अर्थव्यवस्था - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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मजबूत मांग के कारण देश की कारोबारी गतिविधियां अप्रैल में लगभग 14 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। यह मजबूत आर्थिक विकास का संकेत है। एचएसबीसी का खरीद प्रबंधक सूचकांक यानी पीएमआई अप्रैल में बढ़कर 62.2 हो गया। मार्च में यह 61.8 पर था।

पीएमआई से पता चलता है कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में विस्तार का संकेत है। महंगाई में कमी के बावजूद रेपो दर में कटौती में देरी हो सकती है क्योंकि महंगाई में आगे बहुत गिरावट की संभावना नहीं है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि पिछली कुछ तिमाहियों में मजबूत विस्तार के बाद इस साल भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने के लिए अच्छी स्थिति में है।

अगस्त 2021 से पीएमआई 50 से ऊपर रहा है। 50 से ऊपर का मतलब कारोबारी गतिविधियों में तेजी और इससे कम का मतलब कमजोरी है। एचएसबीसी के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी से विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन दिखा है।  

नौकरियों में वृद्धि को मिला समर्थन

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बढ़ती मांग को पूरा करने के प्रयासों से नौकरियों में वृद्धि को समर्थन मिला, जो विनिर्माण क्षेत्र में सबसे अधिक था। यह डेढ़ साल में सबसे तेज गति से बढ़ी। हालांकि मांग की मजबूती से खर्चों का भार ग्राहकों पर डाल दिया गया। सर्वे के अनुसार, महंगाई इतनी तेजी से नहीं गिर सकती कि आरबीआई किसी भी समय दर में कटौती पर विचार करना शुरू कर दे।

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