अगस्त महीने में ही खुदरा वस्तुओं की बिक्री में 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। यह वृद्धि 2019 के प्री कोरोना पैंडेमिक पीरियड की तुलना में थी जो यह साबित कर रही थी कि खुदरा वस्तुओं की मांग एक बार फिर अपने पुराने स्तर पर लौट आई है। सरकार द्वारा इकट्ठी की जा रही जीएसटी कलेक्शन में वृद्धि भी इन आकंड़ों को प्रमाणित कर रही है। माना जा रहा है कि त्योहारी सीजन करीब होने के कारण सितंबर महीने में इस आंकड़े में और ज्यादा वृद्धि होगी जो अक्टूबर में अपने सर्वोच्च तक पहुंच सकती है।
ऑनलाइन बाजार इस समय काफी बेहतर गति से चल रहा है। सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने बड़ी कंपनियों और विक्रेताओं से मिलकर अपने यहां बंपर छूट का एलान कर रखा है। एफएमसीजी प्रोडक्ट्स में चल रही छूट के साथ-साथ मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बिक्री में यह छूट कई हजार रुपयों तक है। जाहिर है कि इससे उपभोक्ताओं को खींचने में मदद मिलेगी और बिक्री में तेज वृद्धि होगी।
चूंकि कोरोना पीरियड में सभी उपभोक्ताओं ने बाजारों में सीधी खरीद से बचते हुए ऑनलाइन बाजार से खरीदारी करने को प्राथमिकता दी थी, माना गया था कि त्योहारी सीजन का सबसे ज्यादा लाभ ऑनलाइन कंपनियों को ही हुआ था। एक अनुमान के मुताबिक यह सेल 90 फीसदी से भी ज्यादा रही थी। खुदरा सेक्टर में केवल एफएमसीजी सेक्टर को ही कुछ बढ़त मिल पाई थी, जबकि भारी भुगतान वाले इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स के मार्केट में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का ही पूरी तरह कब्जा रहा था। बदली परिस्थितियों में अनुमान है कि ऑनलाइन कंपनियों से खरीदारी कुल हिस्सेदारी की तुलना में कम रह सकता है। हालांकि, कुल रूपये की तुलना में यह पहले से भी ज्यादा दर्ज हो सकता है।
महंगाई में बढ़ोतरी क्यों?
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेन्द्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि पिछले छह महीनों से केंद्र का जीएसटी कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है जो यह दिखाता है कि बाजार में रौनक लौट आई है और लोग खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में मांग बढ़ने से कंपनियों को उत्पादन बढ़ाना पड़ा है, इसका सीधा असर रोजगार के अवसरों में वृद्धि के रूप में दिखाई पड़ा है। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों से लगातार बेरोजगारी दर में भी कमी आ रही है।
लेकिन इसी बीच सरकार ने गैस कीमतों में वृद्धि कर दी है। चूंकि गैस अब केवल किचेन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यसायियों के द्वारा अपने सामान की आवाजाही के लिए भी उपयोग किया जा रहा है, सामान्य लोग अपने लिए निजी कारों के मामले में भी सीएनजी आधारित वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं, इसके आलावा गैस का इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन और बिजली उत्पादन में भी हो रहा है, गैस कीमतों में वृद्धि का सीधा असर इन सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा और इसकी मार सीधा उपभोक्ताओं पर पड़ेगी। इससे त्योहारी सीजन में ही उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका लग सकता है और फल, दूध, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इससे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।