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Bangladesh: महज फौरी मरहम है युवान का दामन थामना, बांग्लादेश का असली रोग कहीं गहरा है

Sun, 02 Oct 2022 05:59 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ढाका

सार

विशेषज्ञों ने कहा है कि इसीलिए युवान में भुगतान के फैसले से तात्कालिक राहत भर मिलेगी। देर-सबेर विदेशी मुद्रा के गहरे संकट का बांग्लादेश को मुकाबला करना ही होगा। 
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Bangladesh- Prime minister Sheikh Hasina - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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बांग्लादेश आयात के भुगतान के लिए चीनी मुद्रा युवान का इस्तेमाल लगातार बढ़ा रहा है। इसके बावजूद अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि इस नीति से डॉलर पर बांग्लादेश की निर्भरता घटने की संभावना नहीं है। 

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बांग्लादेश में डॉलर की निर्भरता घटाने की जरूरत कोरोना वायरस महामारी और यूक्रेन युद्ध से बनी स्थितियों के बीच महसूस की गई। इन हालात में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट आई है। विश्व बैंक के ढाका स्थित पूर्व मुखअय अर्थशास्त्री जाहिद हुसैन ने कहा है कि जब से डॉलर की कीमत में बढ़ोतरी शुरू हुई, कारोबारी समुदाय और नीति सलाहकारों की चिंता बढ़ने लगी। उन्होंने वैकल्पिक मुद्रा की जरूरत बताई। ऐसे में चीनी मुद्रा एक स्वाभाविक पसंद बनी।

लेकिन अर्थशास्त्रियों की राय है कि युवान का उपयोग बढ़ाने से भले कारोबारी समुदाय को तात्कालिक लाभ हो, लेकिन बांग्लादेश को इससे कोई बड़ी आर्थिक राहत नहीं मिलने वाली है। चीनी मुद्रा में भुगतान सिर्फ चीन से होने वाले आयात के बदले किया जा सकेगा। जबकि बाकी देशों से व्यापार के लिए डॉलर की निर्भरता बनी रहेगी। बीते 22 सितंबर को बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में 36.8 बिलियन डॉलर बचे थे। जबकि एक साल पहले ये रकम 48 बिलियन डॉलर थी। 
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जाहिद हुसैन ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बातचीत में कहा कि अगर बारीक स्तर पर देखें, तो नई मुद्रा में भुगतान की इजाजत मिलने से कारोबारियों के पास एक विकल्प उपलब्ध हो गया है। पहले युवान में भुगतान करना संभव नहीं था। लेकिन बड़ी तस्वीर को ध्यान में रखें, तो इससे सिर्फ चीन से कारोबार में मदद मिलेगी। बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक ने इसी सितंबर में व्यापार में युवान के इस्तेमाल की इजाजत दी थी। 

चीन के साथ व्यापार में बांग्लादेश भारी घाटे में है। इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक बांग्लादेश से चीन को कुल निर्यात 66 करोड़ 20 लाख डॉलर का हुआ। जबकि चीन से आयात इससे 27 गुना ज्यादा- 18 बिलियन डॉलर का हुआ। इस लिहाज से माना गया है कि बांग्लादेश युवान में चीन को भुगतान कर काफी मात्रा में डॉलर की बचत कर सकेगा। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक समस्या यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में बांग्लादेश युवान कहां से लाए। थिंक टैंक पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक अहसान एच मंसूर ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- बांग्लादेश के निर्यात की सीमित मात्रा का मतलब यह है कि बांग्लादेशी बैंकों के पास युवान की ज्यादा मात्रा मौजूद नहीं है। 

बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में युवान का हिस्सा सिर्फ 1.4 प्रतिशत ही है। मंसूर ने कहा कि हम रेडीमेड कपड़ों के निर्यात पर निर्भर हैँ। निर्यात योग्य बाकी उत्पाद हम तैयार करने में सक्षम नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश की असल समस्या डॉलर की कमी नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की कमजोरी है। निर्यात से ज्यादा आयात होने पर हमेशा ही विदेशी मुद्रा की कमी बनी रहेगी- चाहे वो डॉलर हो या युवान। 

विशेषज्ञों ने कहा है कि इसीलिए युवान में भुगतान के फैसले से तात्कालिक राहत भर मिलेगी। देर-सबेर विदेशी मुद्रा के गहरे संकट का बांग्लादेश को मुकाबला करना ही होगा। 

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