अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई युद्धविराम वार्ता के किसी भी समझौते तक पहुंचने में विफल रहने का सीधा असर सोमवार को घरेलू और वैश्विक सर्राफा बाजारों पर दिखाई दिया। कमजोर वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण, सोमवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं में बिकवाली और मुनाफावसूली का भारी दबाव देखा गया, जिससे सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने बताया कि सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त होने के बाद सोमवार को कीमती धातुएं गिरावट के साथ खुलीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत में आई इस रुकावट ने बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, जिससे अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में उछाल को समर्थन मिला है।
घरेलू बाजार की तरह ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।
हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद कीमतों में कुछ सुधार भी देखा गया। बाजार द्वारा तनाव बढ़ने और इसके कम होने की संभावित स्थितियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के चलते सोने की कीमतें वापस 4,700 डॉलर के पार चली गईं। जतिन त्रिवेदी का मानना है कि चूंकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार की धारणा पर हावी है, इसलिए बाजार में अस्थिरता लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर जयंती के अवसर पर मंगलवार को सर्राफा बाजार बंद रहेंगे। आगे बाजार की दिशा पूरी तरह से वैश्विक तनाव और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।