आम चुनाव के नतीजे सरकार के लिए राहत भरे नहीं रहे हैं। सरकार को मध्य वर्ग की उदासीनता का सियासी नुकसान उठाना पड़ा है। तीन महीने बाद ही हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हैं। सरकार अब सभी वर्गों को साधना चाहती है।
अगले महीने के अंतिम सप्ताह में पेश होने वाले बजट के जरिए मध्य वर्ग और उद्योग जगत को राहत मिलने के आसार हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से संकेत मिले हैं कि सरकार की योजना जहां विकास दर में तेजी लाने के लिए आर्थिक सुधारों का सिलसिला तेज करने का है, वहीं बचत बढ़ाने के उपाय करके मध्य और निम्न मध्यम वर्ग को साधने की है। उद्योग को भी बड़ी राहत की तैयारी की जा रही है।
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मध्य और निम्न मध्य वर्ग के लिए तीन प्रस्ताव सरकार के पास लंबित
पहला-नई कर व्यवस्था ला कर राहत देने की योजना। दूसरा-आय कर की धारा 80 सी के तहत छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ा कर दो लाख करना और तीसरा-होम लोन के ब्याज दर पर राहत देना। इनमें होम लोन के ब्याज दर पर राहत मामले में बीती सरकार में ही सहमति बन गई थी। हालांकि किन्हीं कारणों से इसे लागू नहीं किया गया।
आखिर क्यों याद आया मध्य वर्ग?
आम चुनाव के नतीजे सरकार के लिए राहत भरे नहीं रहे हैं। सरकार को मध्य वर्ग की उदासीनता का सियासी नुकसान उठाना पड़ा है। तीन महीने बाद ही हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हैं। सरकार अब सभी वर्गों को साधना चाहती है।
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बचत नहीं होने की आम शिकायत
बढ़ती महंगाई के कारण बचत नहीं हो पा रही है। मध्य और निम्न मध्य वर्ग होम लोन की ईएमआई, बच्चों की बढ़ती ट्यूशन फीस के कारण बचत करने में परेशानी महसूस कर रहा है।
राष्ट्रपति ने बड़े फैसलों की कही बात
बजट में राहत और आर्थिक सुधार के संकेत अभिभाषण से भी मिले। मुर्मू ने कहा कि आगामी बजट भविष्यदर्शी दस्तावेज होगा। सभी सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाने का प्रावधान होगा। बजट में सरकार की ओर से ऐसे कई बड़े आर्थिक और सामाजिक फैसले लिए जाएंगे जिससे सरकार की दूरगामी नीति और भविष्यकी दूरदर्शिता नजर आएगी।