वित्त वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में सरकार ने करदाताओं को दोहरी राहत दी है। एक तरफ जहां विदेश यात्रा और शिक्षा पर लगने वाले टीसीएस की दरों में कटौती कर मध्यम वर्ग को खुश करने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी तरफ अघोषित विदेशी संपत्ति रखने वालों को 'क्लीन स्लेट' के साथ मुख्यधारा में लौटने का एक मौका दिया गया है।
विदेश यात्रा कार्यक्रम पर पैकेज की बिक्री पर टीसीएस दर घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव कर दिया गया है। शिक्षा और चिकित्सा के लिए एलआरएस के तहत टीसीएस दर दो प्रतिशत कर दिया गया है। कार्यबल सेवाओं पर टीडीएस की दर घटाकर एक या दो प्रतिशत कर दी गई है।
स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, यहां टैक्स प्रस्तावों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट है:
1. टीसीएस और टीडीएस दरों में कटौती: आम आदमी को राहत
विदेश घूमने जाने वाले और अपने बच्चों को विदेश पढ़ाने वाले अभिभावकों के लिए बजट में बड़ी राहत का प्रस्ताव है:
• विदेश यात्रा: विदेश यात्रा कार्यक्रमों की बिक्री पर टीसीएस की दर को घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है।
• शिक्षा और चिकित्सा: उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत शिक्षा और चिकित्सा के लिए विदेश पैसा भेजने पर भी टीसीएस की दर अब 2 प्रतिशत होगी।
• वर्कफोर्स सर्विसेज: कार्यबल सेवाओं पर टीडीएस की दर को घटाकर 1 या 2 प्रतिशत कर दिया गया है।
• निवेशकों के लिए सुविधा: अब डिपॉजिटरी निवेशकों से सीधे फॉर्म 15G या फॉर्म 15H स्वीकार कर सकेंगी और उन्हें कंपनी को सौंप सकेंगी, जिससे टीडीएस न कटने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
2. विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना: मिलेगा छह महीने का मौका
सरकार ने विदेशी आय या संपत्ति को लेकर स्थिति साफ करने के लिए एक नई योजना का प्रस्ताव रखा है:
• समय सीमा: यह एक 6 महीने की विदेशी परिसंपत्ति प्रकटीकरण योजना होगी।
• किसके लिए: यह योजना उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा नहीं किया है, या आय तो बताई है लेकिन अपेक्षित संपत्ति की घोषणा नहीं की है।
• सीमा: इस योजना के तहत अप्रकट आय या परिसंपत्ति की सीमा 1 करोड़ रुपये तक रखने का प्रस्ताव है।
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पेनल्टी में बदलाव: इस योजना के तहत, दंड के स्थान पर 30 प्रतिशत अतिरिक्त आयकर का भुगतान करना होगा।
3. मुकदमेबाजी कम करने और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर जोर
टैक्स विवादों को कम करने और करदाताओं को अनावश्यक कानूनी पचड़ों से बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
• अपील में राहत: अपील दायर करने की अवधि के दौरान दंड राशि पर करदाता को कोई ब्याज नहीं देना होगा। इसके अलावा, अपील के लिए पूर्व भुगतान की मात्रा को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है।
• अपराध की श्रेणी से बाहर: लेखा दस्तावेजों को पेश न करने और भुगतान न करने के मामलों को अब अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया जाएगा। सजा को जुर्माने में बदला जा सकेगा।
• छोटी संपत्ति पर छूट: 20 लाख रुपये से कम की अचल विदेशी परिसंपत्ति की जानकारी नहीं देने पर अब कोई दंड नहीं लगेगा।
4. अन्य महत्वपूर्ण टैक्स प्रस्ताव
• विवाद समाधान: मुकदमेबाजी को कम करने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे। कुछ मामलों में करदाता को देय कर और ब्याज के अलावा 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स देने का प्रावधान भी रखा गया है।
• अप्रवासी भारतीय: किसी अनिवासी की ओर से अचल संपत्ति की बिक्री पर नए नियमों का प्रस्ताव किया गया है।
• दंड मुक्ति: दस्तावेजों के अनुसार, 1 अक्तूबर 2024 से दंड मुक्ति का प्रावधान प्रभावी माना गया है।
सरकार के प्रस्ताव संकेत देते हैं कि सरकार का इरादा टैक्स चोरी रोकने के साथ-साथ ईमानदार करदाताओं को परेशान न करने का है। विदेश यात्रा पर टीसीएस घटना और छोटे विदेशी निवेशों पर दंड समाप्त करना एक स्वागत योग्य कदम है।