केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लोकसभा में बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार पहली बार उद्यम शुरू करने वाली पांच लाख महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए दो करोड़ रुपये का ऋण शुरू करेगी। भारतीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी में बीते कुछ वर्षों में बड़ा इजाफा हुआ है। हालांकि महिला उद्यमियों के लिए लोन योजना के अलावा महिला वर्ग के लिए कोई खास बड़े एलान नहीं किए गए हैं।
महिला उद्यमियों को लोन की योजना
सरकार ने बजट में एससी-एसटी वर्ग की पहली बार उद्यमी बनने वाली महिलाओं के लिए नई योजना शुरू की गई है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में महिला उद्यमियों को दो करोड़ रुपये तक का टर्म लोन उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 स्कीम के तहत आठ करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं और लड़कियों को पोषण देने की बात कही गई है। पीआईबी के आंकड़ों के अनुसार, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी की दर 41% है, जो वैश्विक औसत से कम है। इसे देखते हुए सरकार बजट 2025 में महिला सशक्तिकरण पर जोर दे रही है। आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 252 करोड़ बैंक अकाउंट हैं, जिनमें से 36.4 प्रतिशत यानी करीब 91 करोड़ खाते महिलाओं के हैं।
बजट में एमएसएमई सेक्टर के लिए भी किए गए हैं अहम एलान
वित्त मंत्री ने 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए यह भी कहा कि एसएमई और बड़े उद्योगों के लिए एक विनिर्माण मिशन स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा सरकार श्रम-प्रधान क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सुविधाजनक उपाय करेगी। उन्होंने कहा कि ऋण गारंटी ‘कवर’ को दोगुना करके 20 करोड़ रुपये किया जाएगा तथा गारंटी शुल्क को घटाकर एक प्रतिशत किया जाएगा। वित्त मंत्री ने बिहार में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान की स्थापना करने की घोषणा भी की।
कारोबार को सुगम बनाने के लिए पुराने कानूनों का होगा आधुनिकीकरण
सरकार ने बजट में कारोबारियों की सहूलियत के लिए पुराने कानूनों के आधुनिकीकरण का भी एलान किया है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि वह आधुनिक, लचीली, जन-उपयोगी और विश्वास पर आधारित फ्रेमवर्क तैयार करेगी। जो 21वीं सदी के लिए उपयुक्त होगी। इसके तहत सभी गैर-वित्तीय क्षेत्र में संबंधी नियमों, प्रमाणीकरणों, लाइसेंसों और अनुमतियों की समीक्षा की जाएगी। समिति की सिफारिशें एक वर्ष के भीतर आएंगी। यह देश में विश्वास आधारित आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करेगा और इससे व्यवसाय करने के माहौल (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) में सुधार होगा।