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Budget 2025: भारत का बीमा क्षेत्र अब तक के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों के लिए तैयार, बजट से हैं ये अपेक्षाएं

Tue, 14 Jan 2025 06:04 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Budget 2025: बजट 2025 में बीमा कंपनियां आगामी केंद्रीय बजट में खरीदारों को कर लाभ देने और पॉलिसी बेचने के लिए प्रोत्साहन की मांग कर रही हैं। बाजार के जानकारों के अनुसार, भारत जी-20 के सबसे तेजी से बढ़ते बीमा बाजार के रूप में उभरेगा। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के अनुसार, 2023-24 में देश की बीमा पहुंच 2022-23 में 4 प्रतिशत की तुलना में 3.7 प्रतिशत रहेगी। बीमा सेक्टर की बजट से क्या अपेक्षाएं हैं, आइए समझने की कोशिश करें।
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बजट 2025 - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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बीमा कंपनियां आगामी केंद्रीय बजट में खरीदारों को कर लाभ देने और पॉलिसी बेचने के लिए प्रोत्साहन की मांग कर रही हैं। उनका अनुमान है कि भारत जी-20 के सबसे तेजी से बढ़ते बीमा बाजार के रूप में उभरेगा। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के अनुसार, 2023-24 में देश की बीमा पहुंच 2022-23 की 4 प्रतिशत की तुलना में 3.7 प्रतिशत रहेगी। जीवन बीमा उद्योग का विस्तार पिछले वर्ष के 3 प्रतिशत से मामूली रूप से घटकर 2023-24 के दौरान 2.8 प्रतिशत रह गया। गैर-जीवन बीमा उद्योग के मामले में यह आंकड़ा 2023-24 के दौरान 2022-23 की तरह 1 प्रतिशत पर ही बना रहा।

जी 20 के देशों में भारत में बीमा क्षेत्र की प्रीमियम वृद्धि मजबूत रहने की उम्मीद

मंगलवार को जारी स्विस री की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2025-29 के दौरान औसतन 7.3 प्रतिशत प्रीमियम वृद्धि के साथ जी-20 में अग्रणी रहेगा और इस समूह में सबसे तेजी से बढ़ने वाला बीमा बाजार बन जाएगा। बजट से अपेक्षाओं के बारे में आईसीआरए लिमिटेड की उपाध्यक्ष और सेक्टर प्रमुख (वित्तीय क्षेत्र रेटिंग) नेहा पारिख ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों की कमजोर सॉल्वेंसी स्थिति को देखते हुए, उनके पुनर्पूंजीकरण के लिए बजट में आवंटन की घोषणा सकारात्मक होगी। पारीख ने कहा, "बीमा क्षेत्र में कम पहुंच को देखते हुए सरकार पहुंच को प्रोत्साहित करने के लिए उपायों की घोषणा कर सकती है, विशेष रूप से कम आकार वाली पॉलिसियों के लिए।"

बजट में बीमा उद्योग के प्रतिभागियों को प्रोत्साहन दिए आने की अपेक्षा

जॉपर के सह-संस्थापक और सीओओ मयंक गुप्ता मानते हैं कि बीमा पैठ की गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए उद्योग के प्रतिभागियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। नए ग्राहकों को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना, बीमा कवरेज में तेजी लाने की एक रणनीति हो सकती है। उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी का उपयोग करके और पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर बीमा कम्पनियों को योजनाएं बनाने और वितरित करने में अधिक लचीलापन प्रदान करना समय की मांग है।" गुप्ता ने सुझाव दिया कि अन्य वित्तीय उत्पादों के साथ-साथ बीमा की क्रॉस-सेलिंग को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इससे बीमा कंपनियों की वितरण लागत कम हो जाती है, साथ ही इससे अंतिम ग्राहक के लिए उत्पादों को खरीदना भी आसान हो जाता है।

बीमा पॉलिसी खरीने को बढ़ावा देने के लिए टैक्स छूट में हो वृद्धि

रिन्यूबाय के सह-संस्थापक और सीईओ बालचंदर शेखर के अनुसार केंद्रीय बजट बीमा क्षेत्र को बढ़ावा देने का बड़ा अवसर देता है। बीमा क्षेत्र स्वास्थ्य बीमा को अधिक किफायती बनाने के लिए जीएसटी दरें घटाने की उम्मीद कर रहा है। लोगों को बीमा पॉलिसियां खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स छूट में वृद्धि की जानी चाहिए। यह अंतत: ग्राहकों को सुरक्षा और दीर्घकालिक पूंजी प्रदान करेगी, और पूंजीगत लाभ पर टैक्सेशन को और असान बनाएगी। शेखर ने कहा, "ग्रामीण भारत में बीमा को प्रोत्साहन प्रदान करने से उन क्षेत्रों में बीमा के विस्तार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, जहां इसकी पहुंच बहुत कम है।"

भारत का बीमा क्षेत्र अब तक के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों के लिए तैयार

बजट से जुड़ी अपेक्षाओं पर फ्यूचर जनरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनूप राव ने कहा कि भारत का बीमा क्षेत्र अब तक के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों के लिए तैयार है।आईआरडीएआई ने "वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा" का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिससे हितधारकों को किफायती कवरेज का विस्तार करने के लिए नए और विवेकपूर्ण तरीके तलाशने के लिए प्रेरित किया जा सके।उन्होंने कहा, "बीमा को अफोर्डेवल बनाने से इसकी सुगमता बढ़ेगी, इससे देश भर में बीमा की पहुंच और बढ़ेगी।" स्वास्थ्य बीमा के संबंध में, राव ने कहा कि धारा 80डी के अंतर्गत कटौती की सीमा को बढ़ाने की आवश्यकता है। जानकारों के अनुसार स्वास्थ्य का ध्यान रखने की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद लगभग एक दशक से इसमें बदलाव नहीं हुआ है।

बीमा क्षेत्र बजट में विकास और पहुंच को बढ़ावा दिए जाने की कर रहा उम्मीद

अरंका के निवेश अनुसंधान व विश्लेषण प्रमुख अविनाश जी सिंह ने कहा कि बीमा उद्योग 2025 के केंद्रीय बजट से ऐसे सुधारों की उम्मीद कर रहा है जो विकास और पहुंच को बढ़ावा दे सकें। सिंह ने कहा कि प्रमुख अपेक्षाओं में धारा 80सी के तहत जीवन बीमा प्रीमियम के लिए समर्पित कर कटौती बीमा उत्पादों में अधिक निवेश को प्रोत्साहित करने का उपाय साबित हो सकता है। इस बीच, स्विस रे ने भारत के बीमा बाजार परिदृश्य पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह अगले पांच वर्षों में जी-20 का सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार होगा, जिसकी कुल प्रीमियम मात्रा (जीवन और गैर-जीवन बीमा) औसतन प्रत्येक वर्ष वास्तविक रूप से 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। 

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रिपोर्ट में कहा गया है कि जीवन बीमा के प्रीमियम में वास्तविक रूप से 2024 में 4.8 प्रतिशत और 2025 में 5 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है (2025-29: 6.9 प्रतिशत), जबकि 2023 में इसमें मात्र 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। जोखिम के प्रति बढ़ती जागरूकता, मजबूत आर्थिक विकास और डिजिटलीकरण से जुड़ी पहलों के कारण गैर-जीवन बीमा कारोबार का विस्तार 7.3 प्रतिशत (2024 में 5.7 प्रतिशत से ऊपर) होने का अनुमान है। 31 मार्च 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में  26 जीवन बीमाकर्ता, 25 सामान्य बीमाकर्ता, आठ एकल स्वास्थ्य बीमाकर्ता, 12 पुनर्बीमाकर्ता और विदेशी पुनर्बीमा शाखाएं और दो विशेष बीमाकर्ता पंजीकृत थे।

बजट 2025 से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें।

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