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Union Budget 2023-24: बजट में इन वस्तुओं पर बढ़ सकता है सीमा शुल्क, एनबीएफसी सेक्टर को भी कर राहत की उम्मीद

Wed, 01 Feb 2023 06:31 AM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Budget 2023: आरबीआई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2022-23 की दूसरी तिमाही में बड़े पैमाने पर चालू खाता घाटे के पीछे अंतर्निहित कारक वस्तु व्यापार घाटा 2022-23 की पहली तिमाही में 63.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 83.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई। इसे घटा ने के लिए सरकार सीमा शुल्क में बढ़ोतरी कर सकती है।
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विदेश व्यापार - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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भारत सरकार वित्त वर्ष 2023-2024 के आगामी बजट में निस्संदेह देश की आर्थिक नीतियों में कई बदलाव लाने वाली है। इसकी घोषणा आज यानी बुधवार (1 फरवरी) के बजट भाषण में की जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि सरकार संभावित कस्टम ड्यूटी बढ़ोतरी के लिए 35 आइटम्स की लिस्ट पर मंथन कर चुकी है।

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इस लिस्ट में निजी जेट, हेलीकॉप्टर, उच्च अंत इलेक्ट्रॉनिक आइटम, प्लास्टिक के सामान, आभूषण, उच्च चमक वाले कागज और विटामिन जैसी चीजें है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस कदम का उद्देश्य आयात को कम करना और इनमें से कुछ उत्पादों के स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित करना है।

दिसंबर 2022 में, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने विभिन्न मंत्रालयों को टैरिफ वृद्धि के माध्यम से अपने आयात को नियंत्रित करने के लिए गैर-आवश्यक वस्तुओं की एक सूची बनाने के लिए कहा था। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, भारत के चालू खाते के बैलेंस ने 2022-23 की दूसरी तिमाही में 36.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 4.4 प्रतिशत) का घाटा दर्ज किया। 2022-23 की पहली तिमाही में 18.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 2.2 प्रतिशत) और एक साल पहले 9.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) का घाटा हुआ था। 
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आरबीआई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2022-23 की दूसरी तिमाही में बड़े पैमाने पर चालू खाता घाटे के पीछे अंतर्निहित कारक वस्तु व्यापार घाटे को 2022-23 की पहली तिमाही में 63.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 83.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई। करों में वृद्धि और आयात को कम करने के लिए सरकार की ओर से उठाया गया यह कदम स्थानीय उत्पादन बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है जो घरेलू अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।

# एनबीएफसी सेक्टर को करों में राहत की उम्मीद 

PayMe के संस्थापक व सीईओ महेश शुक्ला के अनुसार वित्तीय प्रौद्योगिकी या फिन-टेक खिलाड़ियों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के साथ उधार या वित्तपोषण उद्योग ने हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण सुधार देखा है। पारंपरिक बैंकों की तुलना में ऋण देने या वितरित करने में तेजी से वृद्धि हुई है। एनबीएफसी सेक्टर को केंद्रीय बजट 2023 के दौरान वित्त मंत्री से बहुत सारी उम्मीदें हैं। फिन-टेक खिलाड़ियों की सबसे बड़ी अपेक्षा कर व्यवस्था का उदारीकरण है।

स्टार्टअप्स को करों में राहत की उम्मीद है। सालाना 10 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक जीएसटी नहीं लगने से छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने और अधिक नौकरियों में सहायता करने में मदद मिलेगी। हम वित्तपोषण के मौजूदा मॉडल को मजबूत करने के लिए बैंकों के साथ बेहतर साझेदारी के लिए सरकार से समर्थन बढ़ाने की भी उम्मीद करते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) फिन-टेक क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए नियमों में और सुधार कर सकता है, जो अधिक पारदर्शिता ला सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे देश में ऋण देने की प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देगा।

# मुथुट फाइनेंस के एमडी ने बजट 2023 से ये उम्मीद जतायी

मुथुट फाइनेंस के एमडी जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथुट के अनुसार व्यापक आर्थिक चुनौतियों और कोविड लहर की जोखिम की आशंका को देखते हुए बजट 2023 से उम्मीद की जा रही है कि यह बजट भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यवसायों को स्थिर और निरंतर विकास के रास्ते पर स्थापित करेगी। इस बजट में सरकार को कैपेक्स खर्च, निवेश गतिविधि/कॉरपोरेट सेक्टर को मदद, एमएसएमई, छोटे व्यवसायों पर फोकस करना चाहिए। विशेष रूप से भारत में एनबीएफसी सेक्टर बजट से छूट, तरलता सहायता (Liquidity Support) और चुनौतीपूर्ण समय से निपटने में मदद से जुड़ी घोषणाओं की उम्मीद कर रहा है।

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