फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budget 2023: RSS ने बढ़ाई वित्त मंत्री की मुश्किलें, OPS-गौ यूनिवर्सिटी और चीनी सामान को लेकर रखीं ये मांगें

सार

Budget 2023-24: वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण ने आरएसएस से जुड़े विभिन्न संगठनों के साथ पिछले माह नवंबर में 21 से 29 के बीच बैठक की थी। इसमें संगठनों के साथ अधिकांश बैठकें ऑनलाइन ही हुई थीं। इस दौरान भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने किसानों की मुश्किलें दूर करने और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अपनी मांगों की एक लंबी-चौड़ी सूची वित्त मंत्री को दी...
विज्ञापन
Budget 2023-24- Nirmala Sitharaman and RSS - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश का 2023-24 का बजट कैसा होना चाहिए? इसे लेकर केंद्र सरकार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वित्त मंत्री राज्य सरकारों के अलावा विभिन्न संगठनों, उद्योगपतियों सहित आर्थिक विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर बजट तैयार करने में जुटी हुई हैं। हालांकि इस बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े संगठनों की कुछ मांगों ने वित्तमंत्री सीतारमण के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं। आरएसएस से जुड़े संगठनों ने वित्तमंत्री से पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से बहाल करने की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन आय में मुद्रास्फीति के आधार पर वृद्धि की मांग की है। संघ ने देश में 51 गौ-विश्वविद्यालय स्थापना के साथ चीन के साथ लगातार बढ़ रहे व्यापार घाटे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री को आयात होने वाले सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया।

हाल ही में हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने पुरानी पेंशन को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया। इसका फायदा कांग्रेस पार्टी को कहीं न कहीं हिमाचल में देखने को मिला। लेकिन गुजरात के लोगों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अब कांग्रेस 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भी इसे बड़ा मुद्दा बना कर और जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े संगठनों की तरफ से वित्त मंत्री को दी गई यह सलाह राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। फरवरी 2023 के बजट सत्र में जब वित्त मंत्री मोदी सरकार का बजट पेश करेंगी, तो वह केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल का पूर्ण आखिरी बजट होगा। इसलिए राष्ट्रीय स्वयं संघ और उससे जुड़े संगठन केंद्र सरकार को लोक लुभावन, मजदूर-किसान, संगठित एवं असंगठित और भारतीय उद्योगों के हित वाला बजट बनाने का सुझाव दिया है, जिससे लोगों की जेब में ज्यादा से ज्यादा पैसा जाए।

किसानों की उन्नति और ग्रामीण विकास पर ज्यादा जोर

वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण ने आरएसएस से जुड़े विभिन्न संगठनों के साथ पिछले माह नवंबर में 21 से 29 के बीच बैठक की थी। इसमें संगठनों के साथ अधिकांश बैठकें ऑनलाइन ही हुई थीं। इस दौरान भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने किसानों की मुश्किलें दूर करने और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अपनी मांगों की एक लंबी-चौड़ी सूची वित्त मंत्री को दी।

बैठक में मौजूद सूत्र ने अमर उजाला से चर्चा में कहा, बीकेएस ने कृषि के सारे इनपुट्स को जीएसटी फ्री करने, खेती की बढ़ी लागत के अनुपात में पीएम किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने, खाद्य में सब्सिडी देने के अलावा डीबीटी के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता देने और सिंचाई एवं नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए ज्यादा फंड देने का सुझाव दिया है।

बीकेएस ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाने के साथ ही देश में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने सहित अन्य कई महत्वपूर्ण सुझाव भी वित्त मंत्री को दिए। संघ ने 'गायों पर केंद्रित' जैविक खेती को लेकर अनुसंधान और नॉलेज बढ़ाने के उद्देश्य से देशभर में 51 यूनिवर्सिटी स्थापित करने का सुझाव भी दिया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमशीलता विकसित हो सकेगी।

बीकेएस ने ग्रामीण कृषि बाजारों (जीआरएएम) में 22,000 हाटों को विकसित करने की योजना में सुस्ती का मुद्दा भी उठाया। इस योजना की घोषणा दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के बजट में 2,000 करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ की थी। बीकेएस से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि इस आवंटन का अधिकांश हिस्सा खर्च नहीं हुआ है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए इस योजना को नए सिरे से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

बीकेएस ने किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा तीन लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की भी वकालत की। उन्होंने वित्त मंत्री से कहा, कार्ड धारकों को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के सर्टिफिकेट की अनिवार्यता के बिना ही माइक्रो-प्रोसेसिंग खाद्य इकाइयों को स्थापित करने का लाइसेंस दिया जाना चाहिए। एफएसएसएआई प्रमाण पत्र हासिल करना एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। सरकार के पास पहले से ही किसान क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा है और इसके आधार पर उन्हें उद्यमी बनने के लिए लाइसेंस दिया जाना चाहिए। यह रोजगार बढ़ाने में मदद करेगा।

कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना पर जोर

बैठक में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने वित्तमंत्री से पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से बहाल करने, न्यूनतम पेंशन की राशि को एक हजार से बढ़ाकर पांच हजार करने एवं इसे वीडीए के साथ लिंक करने, रिटायर्ड एवं पेंशनर्स को आयुष्मान भारत योजना के साथ जोड़ कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने, श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना को मजबूत करने और समाज के कमजोर वर्ग के हितों की सुरक्षा के लिए कई तरह के अन्य कदम उठाने का सुझाव दिया है।

बैठक में बीएमएस ने सुझाव दिया कि ई-श्रम पोर्टल पर सरकार के पास असंगठित क्षेत्र के लगभग 28 करोड़ श्रमिकों का डाटा है। उनके लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए धन के आवंटन की आवश्यकता है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए उन्हें सबसे आखिर में मिलने वाले वेतन की 50 फीसदी पेंशन आवंटित की जा सकती है।

बीएमएस ने घाटे में चल रहे पीएसयू को लेकर सरकार को अपनी नीति बदलने का सुझाव देते हुए इनसे जुड़े सभी लोगों के बकाए वेतन का भुगतान करने की भी मांग की। बीएमएस ने बजट का फोकस असंगठित क्षेत्र के लिए कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ गांव-आधारित, सूक्ष्म और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की वकालत की।

बीएमएस ने बैठक में कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस-95) का मुद्दा भी उठाया। न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की। साथ ही इसका लाभ 70 लाख पात्र पेंशनभोगियों को देने की मांग की। इसके अलावा बीएमएस ने वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्गों के लिए सावधि जमा योजना (एफडी) की सीमा 15 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपये करने और रेलवे यात्रा रियायतों को बहाल करने की मांग रखी।

बीएमएस ने वित्तमंत्री को यह भी प्रस्ताव दिया कि आयुष्मान भारत और पीएम-किसान सम्मान निधि जैसी सभी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए कानून लाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी सरकार उन्हें बीच में न बंद कर सके।

चीनी सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग

आरएसएस से जुड़े संगठन स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) के पदाधिकारियों ने भी वित्त मंत्री को बजट 2023—24 को लेकर सुझाव दिए। एसजेएम ने चीन के साथ बढ़ रहे व्यापार घाटे के 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचने के हालात पर चिंता जताते हुए उन्हें आयात शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया जिससे एक ओर जहां विदेशों पर भारत की निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी तो वहीं दूसरी ओर भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू स्तर पर उत्पादन में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत से जुड़ी परियोजना की तारीफ करते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने वित्त मंत्री सीतारमण को ग्रामीण भारत में खेती से इतर आर्थिक गतिविधियों और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करने का भी सुझाव दिया।

एसजेएम ने सीएसआर फंड की तर्ज पर आरएंडडी के लिए भी नियम बनाने का सुझाव दिया, ताकि कंपनियां अपनी आय या रेवेन्यू का एक हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट के काम के लिए भी खर्च करें। लघु उद्योगों में विनिर्माण बढ़ाने और रोजगार पैदा करने के लिए चीनी आयात को हतोत्साहित करना जरूरी है। चीनी सामानों पर शुल्क बढ़ाने की मांग भी स्वदेशी मंच ने की।

स्वदेशी मंच ने मत्स्य पालन, बागवानी और इससे जुड़े जैसे गैर-फसल गतिविधियों के लिए अधिक बजटीय प्रावधान करके ग्रामीण क्षेत्र को राहत पहुंचाने की मांग रखी। कॉरपोरेट क्षेत्र की तरफ से अनुसंधान और विकास पर खर्च के लिए एक अनिवार्य आउटले की व्यवस्था करने की मांग भी की गई।

सत्ता के फाइनल के लिए अहम है ये बजट

कोविड की तीन लहर बीत जाने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे उबर रही है। बावजूद इसके केंद्र सरकार के लिए यह बजट थोड़ा चुनौतीपूर्ण होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी, रूस-यूक्रेन युद्ध और कर रियायतों के लिए बहुत कम विकल्प होने के बीच वित्त मंत्री सीतारमण को अगले बजट में राजकोषीय खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच संतुलन को रखना एक चुनौती होगा। इसके अलावा वर्ष 2023 में कर्नाटक, तेलंगाना के साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, मिजोरम आदि राज्यों में चुनाव होने हैं। 2024 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए इन राज्यों को सत्ता सेमीफाइनल भी कहा जाता है। ऐसे में हिंदी पट्टी के इन अहम राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रख बजट बनाना वित्त मंत्री के लिए किसी चुनौती से कम होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें