बजट 2020-21 में प्रस्तावित में नई आयकर की दरों में कमी से ऐसे लोगों के हाथों में ज्यादा नकदी बचेगी, जो कर बचाने के लिए निवेश नहीं करना चाहते हैं। राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय ने सोमवार को यह बात कही।
एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि बजट में प्रस्तावित नई व्यवस्था में कम आयकर के लिए सभी को मौजूदा एक्जंप्शन और डिडक्शन छोड़ने का विकल्प दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘हम नहीं कह रहे हैं कि कौन-सा विकल्प फायदेमंद है और कौन-सा फायदेमंद नहीं है। हमने एक विकल्प दिया है। हमने किसी पर बंदिशें नहीं लगाई हैं। इस प्रस्ताव से किसी को सिर्फ फायदा हो सकता है, किसी को नुकसान नहीं होगा।’ उन्होंने कहा कि करदाताओं को 50 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन और बचत योजना में 1.50 लाख रुपये के निवेश और आय के आधार पर 5 फीसदी, 10 फीसदी, 30 फीसदी कर के भुगतान के विकल्प को बनाए रखा गया है।
साथ ही अजय भूषण पांडेय ने बताया कि जिन लोगों को नोटबंदी के बाद इनकम टैक्स का नोटिस मिला था, वे नई टैक्स एमनेस्टी स्कीम का फायदा उठा सकेंगे। इस योजना के तहत 31 मार्च 2020 तक कोई भी डिफाल्टर बिना पेनल्टी आयकर चुका कर विवाद खत्म कर सकता है। इसका मतलब 31 मार्च 2020 के बाद लाभ उठाने वाले को कुछ अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। योजना केवल 30 जून 2020 तक ही उपलब्ध है।
वैकल्पिक तौर पर वे नई व्यवस्था का रुख कर सकते हैं और एक्जंप्शन का दावा करने के लिए निवेश किए बिना कम आयकर का भुगतान कर सकते हैं। नई कर व्यवस्था में 2.5 लाख से पांच लाख रुपये के बीच सालाना आय पर पांच फीसदी कर लगाया जाता है। हर 2.5 लाख रुपये बढ़ने पर क्रमश: 10 फीसदी, 15 फीसदी, 20 फीसदी और 25 फीसदी कर लगाया जाता है। 15 लाख रुपये से ज्यादा आय पर 30 फीसदी कर वसूला जाता है।
बजट 2020 में आम करदाताओं की सुविधा के लिए वित्त मंत्री ने नए आयकर स्लैब की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने 15 लाख सालाना आय वालों का उदाहरण देते हुए बचत का सपना दिखाया। उन्होंने कहा, इस आयवर्ग वालों को अभी 2.73 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता है, नया विकल्प अपनाने पर 1.95 लाख रुपये देना होगा। यानी, उसका कर भार 78 हजार रुपये कम हो जाएगा।