दो गुटों में बंटा है टाटा ट्रस्ट
नोएल टाटा गुट में वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह हैं जबकि दूसरा गुट मेहली मिस्री का है जिसमें प्रमीत जावेरी, जहांगीर एच.सी. जहांगीर, डेरियस खंबाटा हैं। यह गुट पारदर्शिता मॉडर्न गवर्नेस, सख्त निगरानी और टाटा संस की लिस्टिंग की मांग कर रहा है। टाटा ट्रस्ट की एकजुटता में आग लगाने वाला दूसरा मुद्दा बोर्ड में नियुक्तियां और गवर्नेस है। ट्रस्टीज के बीच बोर्ड अपॉइंटमेंट्स और फैसले लेने की प्रक्रिया पर तलवारें खिंची हैं। ताजा विवाद विजय सिंह के टाटा संस बोर्ड में दोबारा अपॉइंटमेंट को रोकने से शुरू हुआ। नोएल टाटा की सुझाई नियुक्तियां भी रुकी हुई हैं। हाल में ही टाटा इंटरनेशनल लि. (टीआईएल) में 1,000 करोड़ के निवेश का निर्णय हुआ। यह फैसला टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा के नेतृत्व में किया गया। फैसले के तरीके ने पारदर्शिता में कमी की शिकायत को हवा दी। टाटा संस के चेयरमैन, एन. चंद्रशेखरन दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाते हैं, उनका कार्यकाल पांच साल बढ़ाने पर दोनों गुट सहमत हुए थे।
विवाद सरकार की चौखट तक पहुंचा
गृह मंत्री अमित शाह व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नोएल टाटा, चंद्रशेखरन, वेणु श्रीनिवासन और डेरियस खंबाटा से मुलाकात की। सरकार को चिंता है कि समूह में कुछ ऊंच-नीच हुआ तो निवेशकों का भरोसा डगमगा जाएगा। यह इस पेशबंदी का ही असर था कि शुक्रवार की बैठक शांतिपूर्ण रही, सौहार्द कितना था यह तो वक्त बताएगा।
मीटिंग में हुए ये फैसले
- हेल्थकेयर फंडिंग : 3 प्रोजेक्ट्स पर सहमति।
- बोर्ड में कोई बदलाव नहीं: विजय सिंह का
- दोबारा नियुक्ति रुकी, वेणु श्रीनिवासन पर चर्चा नहीं।
- सहमति की कोशिश: इंडिपेंडेंट
- डायरेक्टर्स पर मतभेद सुलझाने का वादा।
- लिस्टिंग टली : कोई औपचारिक बहस नहीं।