21 हजार करोड़ का है आईपीओ
इस आईपीओ का आकार 21 हजार करोड़ रुपये है, जो इसे अब तक सबसे बड़ा आईपीओ बनाता है। बता दें कि इस आईपीओ का प्राइस बैंड 902-949 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है लंबी अवधि के लिए इसमें निवेश फायदे का सौदा साबित हो सकता है। शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग 17 मई को होगी।
एंकर निवेशकों ने दिया पूरा अनुदान
गौरतलब है कि एंकर निवेशकों ने भी देश के सबसे बड़े आईपीओ को पूरा अनुदान दिया था। दो मई को इसे एंकर निवेशकों के लिए खोला गया था, जिनसे आईपीओ ने 5627 करोड़ रुपये जुटाए थे। एलआईसी के आईपीओ का लॉट साइज 15 शेयरों का है। यानी अगर आप एलआईसी के आईपीओ में हिस्सा लेना चाहते हैं तो आपको कम से कम 15 शेयरों के लिए बोली लगानी पड़ेगी। एलआईसी ने आईपीओ में किसी एक इन्वेस्टर के लिए दो लाख रुपये की लिमिट तय की है। इसका मतलब यह है कि आप अधिकतम 14 लॉट के लिए बोली लगा सकते हैं।
शनिवार को भी लगा सकेंगे बोली
बुधवार को एलआईसी आईपीओ के लिए बिडिंग शुरू हो गई और इसके साथ ही देश के इस सबसे बड़े आईपीओ के लिए एक और बड़ा फैसला किया गया है, जो कि पहले किसी आईपीओ के लिए नहीं किया गया। बता दें कि शेयरों के लिए आप शनिवार को भी बोली लगा सकते हैं। यानी सरकार निवेशकों को बोली लगाने का पूरा मौका दे रही है। इस आईपीओ को नौ मई तक सब्सक्राइब्ड किया जा सकता है, जिसमें एक शनिवार भी शामिल है जिसे अतिरिक्त जोड़ा गया है।
विशेषज्ञों की आईपीओ को लेकर ये राय
विशेषज्ञों का कहना है कि एलआईसी के आईपीओ में निवेश फायदे का सौदा साबित होगा। एमडी इंडिया, ब्रांच पर्सनल फाइनेंस एप की सुचेत महापात्रा का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद भारत का बहुप्रतीक्षित आईपीओ बुधवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया। एंकर निवेशकों ने पहले ही इसमें अपनी बंपर भागीदारी दिखाई है। उन्होंने कहा कि यह 21000 करोड़ मेगा आईपीओ बाजार से तरलता को सोख लेगा जो पहले से ही भारी दबाव में है। इसके अलावा यह म्यूचुअल फंड निवेश पोर्टफोलियो को भी बदल देगा। वहीं कुछ विशेषज्ञ निवेशकों की राय है कि बीते दिनों बड़े आईपीओ का हाल देखते हुए इसे लेकर भी कई आशंकाएं हैं। जीउस डी, कोफाउंडर और सीईओ, ब्रिजअप कहते हैं कि हाल ही में खुदरा निवेशकों ने भारत के कुछ सबसे बड़े आईपीओ में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। हाल के सप्ताहों में एलआईसी का निर्गम मूल्य भी लगभग आधा हो गया है और खुदरा निवेशकों को यह सवाल करना चाहिए कि क्यों। उन्होंने कहा कि भले ही एलआईसी का कारोबार हमेशा मजबूत रहा हो, लेकिन निवेशकों को भाग लेते समय रूढ़िवादी होना चाहिए।