घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी और ब्लू-चिप रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी के चलते शुक्रवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई, जिससे शेयर बाजार शुरुआती कारोबार में ऊपर चढ़े।
शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 158.19 अंक चढ़कर 85,346.79 पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 55.8 अंक बढ़कर 26,202.35 पर पहुंच गया। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से एशियन पेंट्स, मारुति, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एनटीपीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स सबसे बड़े लाभ कमाने वालों में शामिल थीं।
आईटीसी, टाइटन कंपनी, एचसीएल टेक और कोटक महिंद्रा बैंक पिछड़ने वालों में शामिल थे। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 3,268.60 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 1,525.89 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
बीमा कंपनियों की उच्च लागत रणनीति ने महंगा किया प्रीमियम
आरबीआई ने बीमा क्षेत्र में संरचनात्मक दबावों की ओर इशारा करते हुए कहा है कि बीमा प्रीमियम में वृद्धि अब संचालन दक्षता के बजाय कंपनियों की उच्च-लागत वितरण-प्रेरित रणनीतियों से संचालित हो रही है। आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा, हाल में देखने में आया है कि सतही स्थिरता के बावजूद मध्यम अवधि में निरंतरता और कवरेज विस्तार पर दबाव बन सकता है। मुख्य दबाव उच्च खर्च संरचना, खासकर अधिग्रहण लागत की लगातार उच्च दर के रूप में दिखाई देता है। प्रीमियम वृद्धि अब अधिकतर उच्च-लागत वितरण रणनीतियों के कारण है, परिचालन दक्षता के कारण नहीं।
रिपोर्ट कहती है कि जीवन बीमा क्षेत्र में अग्रिम अधिग्रहण लागत ने यह सुनिश्चित नहीं होने दिया कि पैमाना बढ़ने पर लाभ सीधे पॉलिसीधारक तक पहुंचे। डिजिटलीकरण से होने वाले संभावित लाभ भी अभी तक पूरी तरह से हासिल नहीं हुए हैं। यह रिपोर्ट चेतावनी अंदाज में कहती है, बीमा कंपनियों के लगातार उच्च खर्च लाभांश को कमजोर कर सकते हैं। बीमा कंपनियों की कुल प्रीमियम आय 2024-25 में 11.9 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि 2020-21 में यह 8.3 लाख करोड़ रुपये थी।