भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर तीसरे दौर की वार्ता सभी मोर्चों पर सकारात्मक प्रगति के साथ पूरी हो गई है। दोनों देशों का कहना है कि उनका लक्ष्य 2026 में बातचीत पूरी करना है। वाणिज्य विभाग की ओर से जारी सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, भारत और कनाडा ने 6 से 10 जुलाई तक ओटावा में सीईपीए के लिए तीसरे दौर की वार्ता पूरी की। चर्चा के दौरान लगभग सभी मोर्चों पर सकारात्मक प्रगति देखी गई, जो नेताओं के दृष्टिकोण के अनुरूप 2026 में बातचीत को संपन्न करने की दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दोहराती है। उम्मीद है, सीईपीए पारंपरिक वस्तुओं पर केंद्रित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से आगे बढ़कर सेवाओं, निवेश, सरकारी खरीद, डिजिटल व्यापार और सतत विकास को कवर करेगा। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच, मूल स्थान नियम, सेवा क्षेत्र में व्यापार और महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ तकनीक, कृषि और दवाओं सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। कनाडा भारत के लिए पोटाश, दालों और ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है, जबकि भारत कनाडा को दवाएं, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और आईटी सेवाओं का निर्यात करता है। हालांकि तीसरे दौर में बनी सहमति के विवरण का खुलासा नहीं किया गया था, लेकिन यह बयान इस साल के अंत में मंत्री-स्तरीय जुड़ाव से पहले तकनीकी बारीकियों को सुलझाने में तेजी का संकेत देता है।
भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई से होगा लागू
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। इसके बाद भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले सामान पर आयात शुल्क नहीं लगेगा। यह समझौता भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। गोयल ने बताया, इसी दिन डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन एग्रीमेंट भी लागू होगा, जिससे ब्रिटेन में भारतीय पेशेवरों को बड़ा लाभ मिलेगा। पहले ब्रिटेन में पांच साल तक काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के वेतन का 25% सामाजिक सुरक्षा अंशदान में जाता था, लेकिन उसका लाभ उन्हें नहीं मिल पाता था। अब यह राशि भारत में उनके भविष्य निधि (पीएफ) खाते में जमा होगी।