एशिया-प्रशांत ऑफिस मार्केट में भारत सबसे बड़ा डिमांड सेंटर
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के ऑफिस रियल एस्टेट बाजार में भारत ने अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखी है और यह क्षेत्र में सबसे बड़ा डिमांड सेंटर बनकर उभरा है।
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कोलियर्स की एशिया प्रशांत कार्यालय बाजार अंतर्दृष्टि फरवरी 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में एशिया के 11 प्रमुख बाजारों में कुल ऑफिस लीजिंग 9.8 मिलियन वर्ग मीटर रही, जो सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन 11 बाजारों में कुल ऑफिस लीजिंग का करीब 68 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत का रहा, जबकि नई सप्लाई में भारत की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि क्षेत्रीय ऑफिस बाजार में भारत की मांग और निवेश गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं। कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और हेड ऑफ रिसर्च विमल नादर ने कहा कि स्थिर आर्थिक वृद्धि, मजबूत ऑक्यूपायर बेस और तेजी से बढ़ते ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs) भारत के ऑफिस बाजार को मजबूती दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2025 में भारत ने ऑफिस निवेश में भी सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की, जो इसकी व्यापकता और लचीलेपन को दर्शाता है।
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत रिकॉर्ड निचले स्तर पर, $2 प्रति किलोग्राम का लक्ष्य अब दूर नहीं: अमिताभ कांत
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की लागत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारत के पूर्व जी 20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि देश में ग्रीन हाइड्रोजन की अब तक की सबसे कम खोजी गई कीमत दर्ज की गई है, जिससे इसे सस्ता बनाने के लक्ष्य को नई गति मिली है।
अमिताभ कांत ने सोशल मीडिया पर बताया कि असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी को हर साल 10,000 टन ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए जारी टेंडर में इसकी कीमत ₹279 प्रति किलोग्राम (लगभग 3.08 डॉलर) दर्ज की गई है, जो अब तक का सबसे कम स्तर है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सरकार की नीतियों और सस्ती नवीकरणीय बिजली की उपलब्धता के कारण संभव हो पाई है। सरकारी प्रोत्साहन और कम लागत वाली रिन्यूएबल ऊर्जा ने ग्रीन हाइड्रोजन को लागत के मामले में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है। कांत के अनुसार, इस प्रगति से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का ग्रीन हाइड्रोजन को 2 डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाने का लक्ष्य अब दूर का सपना नहीं रह गया है।