नया वित्त वर्ष कल यानी एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। वित्त वर्ष के पहले दिन से कई बड़े बदलाव हो रहे हैं। इनका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कि म्यूचुअल फंड से जुड़े कौन-कौन से नियमों में होगा संशोधन...
बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड से जुड़े नियमों में एक अप्रैल से कई कई बदलाव किए हैं। इसके तहत एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) को न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) से जुटाई गई रकम को 30 दिन में निवेश करना होगा। पहले यह समयसीमा 60 दिन थी।
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इसके अलावा सेबी ने म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए 'स्ट्रेस टेस्टिंग' के खुलासे को अनिवार्य कर दिया है, ताकि निवेशकों को स्कीम की वित्तीय स्थिरता को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिले। नए नियमों का मकसद म्यूचुअल फंड्स के परिचालन को ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाना, जवाबदेही बढ़ाना और निवेशकों का भरोसा मजबूत करना है।
बिना किसी एग्जिट लोड के अपना पैसा निकाल सकते हैं
अगर कोई एएमसी 30 दिन में फंड निवेश नहीं कर पाती, तो निवेशकों को बिना किसी एग्जिट लोड के अपना पैसा निकाल सकते हैं।
एएमसी कर्मचारियों को वेतन का एक हिस्सा करना होगा निवेश
एएमसी के कर्मचारियों के लिए वेतन का एक निश्चित हिस्सा म्यूचुअल फंड स्कोमों में निवेश करना अनिवार्य होगा। यह निवेश कर्मचारी के पद और जिम्मेदारी के आधार पर तय किया जाएगा। इसे सेवी के निधर्धारित नियमों के अनुसार लागू किया जाएगा।
पैन-आधार लिंक नहीं, तो भूल जाइए लाभांश
अगर आपने अभी तक अपना पैन और आधार लिंक नहीं किया है, तो एक अप्रैल से आपको लाभांश मिलना बंद हो जाएगा। इसके बाद लाभांश और कैपिटल गेन्स से होने वाली कमाई पर अधिक टीडीएस भी लगने लगेगा। इतना ही नहीं, आपको फॉर्म 26एस में कोई क्रेडिट भी नहीं मिलेगा।