ईएसी-पीएम के चेयरमैन देबरॉय ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को लेकर यह टिप्पणी करते हुए यह भी कहा है कि कर चोरी गैरकानूनी है, लेकिन छूट के प्रावधान के जरिये कर से बचाव कानूनी रूप से सही है। उन्होंने कहा, जितना हम कर छूट देंगे, यह उतना जटिल बनेगा।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन बिबेक देबरॉय ने सोमवार को कहा कि जीएसटी प्रणाली में सिर्फ एक दर होनी चाहिए। इससे मुकदमेबाजी कम होगी और प्रशासनिक अनुपालन बढ़ेगा। हालांकि, मुझे नहीं लगता है कि कभी ऐसा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी इस राय को ईएसी-पीएम का सुझाव नहीं माना जाए।
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ईएसी-पीएम के चेयरमैन ने कहा कि अभिजात्य प्रकृति व अधिक उपभोग वाले उत्पादों पर कर की अलग-अलग दरें हटा दी जाएं तो इससे मुकदमेबाजी कम होगी। इसलिए हमें यह समझने की जरूरत है कि उत्पाद कोई भी हो, जीएसटी दर एक होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कॉरपोरेट कर और व्यक्तिगत आयकर के बीच कृत्रिम अंतर को समाप्त किया जाना चाहिए। इससे प्रशासनिक अनुपालन का बोझ कम होगा।
छूट रहित हो कराधान प्रणाली
उन्होंने कहा, कर चोरी गैरकानूनी है, लेकिन छूट के प्रावधान के जरिये कर से बचाव कानूनी रूप से सही है। उन्होंने कहा, जितना हम कर छूट देंगे, यह उतना जटिल बनेगा। कराधान प्रणाली छूट रहित होनी चाहिए। सरकार से जीडीपी के 5-5.5 फीसदी के बराबर कर छूट मिलती है।
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प्रत्यक्ष करों से प्रगतिशीलता दिखेगी
प्रगतिशीलता दिखाना चाहते हैं तो यह प्रत्यक्ष करों के जरिये होनी चाहिए, जीएसटी या अप्रत्यक्ष करों से नहीं। केंद्र-राज्यों का कर संग्रह जीडीपी का महज 15% है, जबकि सार्वजनिक ढांचे पर खर्च की मांग कहीं ऊंची है।