सरकार की ‘जन-विरोधी’ नीतियों के खिलाफ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 8 जनवरी को होने जा रही देशव्यापी हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोग शामिल होंगे। इन ट्रेड यूनियनों सहित विभिन्न बैंकिंग संघों और फेडरेशनों ने पिछले साल सितंबर में इस हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। इस दौरान सार्वजनिक परिवहन, दूध व सब्जी से लेकर के नेटबैंकिंग, एटीएम, फंड ट्रांसफर जैसी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी ने सोमवार को संयुक्त बयान में कहा कि देशव्यापी हड़ताल में कम से कम 25 करोड़ लोगों की भागीदारी की उम्मीद है। सरकार से श्रमिक विरोधी, जन-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग करेंगे।
बैंकिंग सेक्टर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आठ जनवरी को हड़ताल का फैसला किया है। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के एक नेता ने बताया कि इस हड़ताल का समर्थन 10 यूनियन कर रही हैं। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव सीएच वेकंटचलम के अनुसार सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए हड़ताल की जा रही है। हड़ताल में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, श्रम कानूनों में संशोधन पर रोक लगाने और नौकरी की सुरक्षा संबंधी मांगें रखी जाएंगी। रिजर्व बैंक के कर्मचारियों ने वर्षों से लंबित मांगों के पूरा न होने पर हड़ताल का समर्थन किया है। इस दिन बैंकिंग संबंधी सभी तरह के कामकाज ठप रहेंगे, जिससे लोगों को एटीएम में भी पैसा नहीं मिलेगा।
हड़ताल की वजह से लोगों को दूध, सब्जी, दवाएं आदि भी मिलने में मुश्किल हो सकती है। वहीं सार्वजनिक परिवहन जैसे कि टैक्सी, ऑटो, बस आदि की सेवाओं पर असर पड़ सकता है, जिससे सभी तरह के रेल, सड़क और हवाई यात्रियों को परेशानी हो सकती है। इस दौरान निजी वाहनों से ही सफर किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि कई ताकतें आर्थिक मुद्दों पर केंद्र सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन सरकार कारोबारियों के हितों को समझते हुए उसी दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती वैश्विक मंदी का हिस्सा है। भारत के मुकाबले विकसित देशों पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ा है।