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ओपेक देशों की बैठक से पहले गिरा कच्चे तेल का दाम, 21 दिनों में मिली 2.25 रुपये की मामूली राहत

Thu, 21 Jun 2018 12:50 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक की शुक्रवार से शुरू हो रही दो दिनों की बैठक से पहले पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 1 जून से लेकर के अब तक इन पर अधिकतम 2.25 रुपये की राहत तेल कंपनियां आम जनता को दे चुकी हैं। हालांकि इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी भी अपने उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं। 
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गुरुवार को यह हुई कटौती
देश में तेल कंपनियों ने गुरुवार को 11 पैसे से लेकर के 14 पैसों की कटौती की है। अभी भी मुंबई के लोग 84 रुपये से ज्यादा दाम एक लीटर पेट्रोल खरीदने पर खर्च कर रहे हैं। दिल्ली में पेट्रोल का दाम 76.16 रुपये हो गया है। वहीं डीजल 67.68 रुपये है। 

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गिरा कच्चे तेल का दाम
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम पिछले 30 दिनों में 6 डॉलर प्रति बैरल कम हो गया है। इस वजह से फिलहाल भारत के लोगों को भी इसका फायदा मिल रहा है। ओपेक देश भी शनिवार को फैसला लेंगे कि वो उत्पादन को बढ़ाएं या फिर कीमतों को ऊंचा रखने के लिए उत्पादन में कटौती करें।
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अगर कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती होती है, तो फिर भारत अपनी निर्भरता अरब देशों के बजाए अमेरिका और चीन पर कर देगा, जिससे दाम नियंत्रण में रह सकेंगे।
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जीएसटी के साथ देना पड़ेगा वैट

पेट्रोल व डीजल को अगर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाता है, तो उस पर लगने वाले कर की संरचना में 28 फीसदी जीएसटी तथा राज्यों द्वारा लगाया गया कर या मूल्य वर्धित कर (वैट) शामिल हो सकता है। केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी है। 

जीएसटी की सबसे उच्च दर (28 फीसदी) तथा वैट दोनों को मिलाकर उतना ही कर भार होगा, जितना यह दोनों ईंधनों पर मौजूदा समय में लग रहा है, जिसमें उत्पाद शुल्क तथा राज्यों द्वारा लगाया गया वैट शामिल है।

केंद्र सरकार को करना होगा यह बड़ा फैसला
पेट्रोल तथा डीजल को जीएसटी में लाने से पहले केंद्र सरकार को यह फैसला करना होगा कि क्या वह लगभग 20,000 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट तेल खरीदारों को देने की इच्छुक है, जिसे वर्तमान में वह अपने पास रखती है, क्योंकि ईंधन फिलहाल जीएसटी व्यवस्था से बाहर है। 
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