पेट्रोल व डीजल को अगर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाता है, तो उस पर लगने वाले कर की संरचना में 28 फीसदी जीएसटी तथा राज्यों द्वारा लगाया गया कर या मूल्य वर्धित कर (वैट) शामिल हो सकता है। केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
जीएसटी की सबसे उच्च दर (28 फीसदी) तथा वैट दोनों को मिलाकर उतना ही कर भार होगा, जितना यह दोनों ईंधनों पर मौजूदा समय में लग रहा है, जिसमें उत्पाद शुल्क तथा राज्यों द्वारा लगाया गया वैट शामिल है।
केंद्र सरकार को करना होगा यह बड़ा फैसला
पेट्रोल तथा डीजल को जीएसटी में लाने से पहले केंद्र सरकार को यह फैसला करना होगा कि क्या वह लगभग 20,000 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट तेल खरीदारों को देने की इच्छुक है, जिसे वर्तमान में वह अपने पास रखती है, क्योंकि ईंधन फिलहाल जीएसटी व्यवस्था से बाहर है।