बैंकों के कर्ज डूबने की समस्या बढ़ती ही जा रही है। सरकार के आंकड़े भी इस मामले में चिंताजनक तस्वीर बता रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष के दौरान नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) की रिकवरी में 23 फीसदी की गिरावट आई। 31 मार्च 2024 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में 1,23,299 करोड़ रुपये के एनपीए रिकवर किए गए। उससे पहले वित्त वर्ष 2022-23 में 1,59,787 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई थी।
ऐसे कर्ज को कहा जाता है एनपीए
वित्त मंत्री ने संसद में बताया आंकड़ा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एनपीए और उसकी रिकवरी के आंकड़ों की जानकारी सोमवार को संसद में दी। 25 नवंबर से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार से एनपीए और उसकी रिकवरी को लेकर सवाल पूछे गए थे। वित्त मंत्री के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भले ही एनपीए की रिकवरी में गिरावट आई, लेकिन उससे पहले लगातार दो वित्त वर्ष से रिकवरी में तेजी आ रही थी। वित्त वर्ष 2020-21 में एनपीए की रिकवरी का आंकड़ा 1,14,368 करोड़ रुपये और 2021-22 में 1,37,456 करोड़ रुपये रहा था।
सरकारी बैंकों के पास सबसे ज्यादा एनपीए
प्राइवेट बैंकों की स्थिति काफी बेहतर
प्राइवेट सेक्टर के बैंक इस मामले में बेहतर स्थिति में है। प्राइवेट सेक्टर में सबसे ज्यादा एनपीए एचडीएफसी बैंक का है। उसके ग्रॉस एनपीए का आंकड़ा 31,057 करोड़ रुपये है। यह एमकैप के हिसाब से अब एसबीआई को पीछे छोड़ देश का सबसे बड़ा बैंक बन चुका है। दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई बैंक का ग्रॉस एनपीए 27,314 करोड़ रुपये है।