बेंगलुरु की एक विशेष सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी मामले में पांच लोगों को अलग-अलग दिनों के कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर कुल 22 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया है। सीबीआई ने 10 साल पहले यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक शिकायत पर मामला दर्ज किया था। बैंक को नेक्ससॉफ्ट इन्फोटेल लिमिटेड की ओर से ऋण अदायगी में चूक से 18.34 करोड़ का नुकसान हुआ था।
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 18.34 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में विभिन्न आरोपियों को एक साल से लेकर चार साल तक के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पांचों आरोपियों पर 22 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया है। कंपनी नेक्ससॉफ्ट इन्फोटेल लिमिटेड पर भी एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
किसे-कितनी सजा हुई?
- मेसर्स नेक्ससॉफ्ट इन्फोटेल लिमिटेड के निदेशक जी. धनंजय रेड्डी को 10 करोड़ के जुर्माने के साथ चार साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है।
- के सत्यनारायण को 12 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ चार साल की साधारण कारावास की सजा होगी।
- निजी कंपनी की प्रबंध निदेशक जी. निर्मला को एक साल के साधारण कारावास के साथ एक लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा।
- निजी कंपनी के निदेशक दिनेश कावूर को एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ एक साल की साधारण कैद की सजा सुनाई गई है।
- यूबीआई छावनी शाखा बेंगलुरु के तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) राजेश कुमार माधव को 50,000 रुपये के जुर्माने के साथ एक साल की साधारण कैद की सजा हुई है।
क्या है मामला?
आरोपी कंपनी ने दुबई स्थित कंपनी से सॉफ्टवेयर आयात करने और बेंगलुरु में एक अन्य निजी कंपनी से सॉफ्टवेयर खरीदने के लिए यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया से 16 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया था। इसके लिए आरोपी ने 21.50 करोड़ रुपये के सॉफ्टवेयर पैकेज और बेंगलुरु के सदरमंगला गांव में एक एकड़ से अधिक की जमीन को सिक्योरिटी के तौर पर दिया था। आरोप था कि उधारकर्ता कंपनी ने धन का दुरुपयोग किया और खाते में कोई प्राथमिक सुरक्षा (निश्चित रकम) नहीं बनाई गई, जो किश्तों का भुगतान न करने के कारण अनियमित हो गई। एजेंसी ने 30 दिसंबर 2013 को आरोपपत्र दाखिल किया था।