कम बिक्री के चलते लगातार घाटा सह रही दुनिया की टॉप कार निर्माता कंपनी निसान मोटर्स ने ऐलान किया है कि वह अगले तीन सालों में 12,500 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है, जिसके बाद दुनियाभर के ऑटो सेक्टर में हड़कंप मच गया है। वहीं निसान के इस फैसले की तपिश में भारत का ऑटो सेक्टर भी आएगा। कंपनी भारत में भी 1700 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है। इधर, निसान के एलान से पहले ही भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर मंदी से जूझ रहा है और देश की बाकी ऑटोमोबाइल कंपनियां भी छंटनी का रास्ता अख्तियार कर सकती हैं।
इसकी वजह है कि मई, 2019 तक कई कार कंपनियों ने अपने शोरूम बंद कर दिए हैं या फिर कार डीलरों ने कम बिक्री और ज्यादा इंंवेट्री के बोझ के चलते काम समटने में ही भलाई समझी है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो सालों में 200 से ज्यादा पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और ट्रक डीलरों ने अपने 300 से ज्यादा शोरूम्स का शटर गिरा दिया है। इनमें 38 निसान, 23 ह्यूंदै और 9 से 12 डीलर मारुति, महिंद्रा, होंडा और टाटा के हैं। आंकड़ों के मुताबिक अकेले महाराष्ट्र में 56 और बिहार में 26 शोरूम्स पर ताला लग चुका है। वहीं मुंबई में 26, पुणे में 21 और दिल्ली-एनसीआर में 35 से ज्यादा शोरूम बंद हो चुके हैं। अनुमान के मुताबिक इन शोरूम्स के बंद होने से अभी तक तीन हजार लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं, वहीं निसान के फैसले के बाद से 1700 और कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट के बादल खड़े हो गए हैं।
ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि देश में इन दिनों 15 हजार ऑथराइज्ड डीलर हैं, जो देशभर में 25 हजार आउटलेट्स को मैनेज करते हैं। वहीं इनमें से केवल 30 फीसदी ही मुनाफे में हैं। जबकि इनमें से 30 फीसदी का प्रोफिट ही केवल एक से दो फीसदी तक है।
कई बड़े और छोटे डीलरों के पास छह महीने पुराना स्टॉक पड़ा हुआ है, जो निकल नहीं रहा है। ऐसे में इन डीलरों का शोरूम और कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए पैसे देने का खर्चा भी नहीं पूरा हो रहा है।
ऑटो सेक्टर में 25 हजार लोगों की नौकरी जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक बड़े शोरूम में 150 कर्मचारी और छोटे शोरूम में 60 कर्मचारी रहते हैं। एक बड़े डीलर के पास 12 से 15 शोरूम और छोटे के पास पांच शोरूम होते हैं।
जब एक कंपनी किसी को डीलर बनाती है तो फिर उसको कम से कम हर महीने 300 गाड़ियों की बिक्री करने का टारगेट दिया जाता है। वहीं वो 500 गाड़ियों का स्टॉक रख सकता है। डीलर को जो गाड़ियां मिलती हैं, उसके लिए उसे एडवांस में पेमेंट करना होता है।
बिक्री न होने के चलते बैंकों व एनबीएफसी कंपनियों ने डीलरों को अब फाइनेंस करना बंद कर दिया है। बड़े शहरों में फिलहाल शोरूम बंद होना शुरू हो गए हैं। थोड़े दिनों में इसका असर छोटे शहरों व कस्बों में भी दिखने लगेगा। बैंकों का कहना है कि अगर गाड़ियों की बिक्री में इजाफा होता है तो फिर से फाइनेंस की सुविधा को शुरू किया जा सकता है।