सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी निजी कंपनियों को बेचने के लिए पहली बार एक विनिवेश मंत्रालय का गठन किया था। वाजपेयी जी के कार्यकाल में देश की कई कंपनियों को निजी हाथों में सौंपा गया था। इन कंपनियों में भारत ऐल्युमिनियम कंपनी (बाल्को) और हिंदुस्तान जिंक, इंडिया पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) में विनिवेश का था। वाजपेयी के इन पहलों से भविष्य में सरकार की भूमिका तय हो गई।
सरकारी खर्चों को किया था कम
कई सरकारी विभागों में मीटिंग व सम्मलेन के नाम काफी पैसा खर्च किया जाता था। इसके साथ ही राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए राजकोषीय जवाबदेही एक्ट को बनाया था। वित्त वर्ष 2000 में जीडीपी के -0.8 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2005 में 2.3 फीसदी तक पहुंच गई।
बीएसएनएल का किया था गठन
वाजपेयी जी के पास देश में टेलिकॉम क्रांति लाने का श्रेय भी है। पहली बार उन्होंने भारत संचार निगम लिमिटेड के नाम से एक अलग कंपनी का गठन किया था, जो पूरे देश में दूरसंचार सेवाएं देगी। इसके अलावा मोबाइल कंपनियों के लिए लाइसेंस फीस को फिक्स से हटाकर रेवेन्यू के आधार पर कर दिया था।
दिया गया था शाइनिंग इंडिया का नारा
वाजपेयी जी ने आर्थिक तौर पर सुधार करने के बाद शाइनिंग इंडिया का नारा दिया था। हालांकि यह नारा 2004 के चुनावों के दौरान दिया गया था। लेकिन उस चुनाव में यह नारा लोगों को रास नहीं आया, जिसके बाद चुनावों में भाजपा को करारी हार मिली और इसके बाद 10 साल तक यूपीए की सरकार रही।