आशिमा गोयल ने कहा, नोटबंदी के सख्त कदम की कुछ अल्पकालिक लागत चुकानी पड़ी। लेकिन, लंबी अवधि में कुछ लाभ भी होंगे। डिजिटलीकरण की दर में वृद्धि, अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने और कर चोरी की घटनाओं में कमी जैसे लाभ प्रमुख हैं।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सदस्य आशिमा गोयल ने नोटबंदी की वजह से देश में कर संग्रह में तेजी आई। सरकार का यह कदम देश में एक व्यापक आधार पर कम कर लगाने की आदर्श स्थिति की ओर ले जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा करते हुए कहा था कि इस अप्रत्याशित कदम से काला धन पर लगाम लगाने के साथ ही डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञापन
गोयल ने कहा, नोटबंदी के सख्त कदम की कुछ अल्पकालिक लागत चुकानी पड़ी। लेकिन, लंबी अवधि में कुछ लाभ भी होंगे। डिजिटलीकरण की दर में वृद्धि, अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने और कर चोरी की घटनाओं में कमी जैसे लाभ प्रमुख हैं।
जीएसटी 7वें माह भी 1.40 लाख करोड़ पार
कर विभाग ने गत 9 अक्तूबर को कहा था कि चालू वित्त वर्ष में कुल टैक्स संग्रह करीब 24 फीसदी बढ़कर 8.98 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। जीएसटी संग्रह इस साल सितंबर में लगातार सातवें महीने 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। इस दौरान जीएसटी संग्रह एक साल पहले की तुलना में 26 फीसदी वृद्धि के साथ 1.47 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
विज्ञापन
आईडीबीआई बैंक : निजीकरण के बाद नए मालिक को पूरी स्वतंत्रता
सरकार व सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी एलआईसी आईडीबीआई बैंक के भावी प्रवर्तकों को स्वतंत्रता देना चाहते हैं। इसलिए दोनों इस बैंक के नए मालिक के किसी प्रस्ताव पर किसी तरह की अड़चन नहीं खड़ी करेंगे।
आईडीबीआई बैंक में 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए इस महीने की शुरुआत में बोलियां मंगाई गई थीं। बैंक में सरकार का हिस्सा 45.48% व एलआईसी की 49.24% है। बैंक का मूल्यांकन 47,633 करोड़ रुपये है। मौजूदा मूल्य पर करीब 61 फीसदी की हिस्सेदारी बेचने से केंद्र को 29,000 करोड़ मिलेंगे।
एक अधिकारी ने बताया कि निजीकरण के बाद बैंक में सरकार व एलआईसी की हिस्सेदारी घटकर 34 फीसदी रह जाएगी। हालांकि, नए प्रवर्तक के प्रस्तावित समाधान को रोकने की उनकी मंशा नहीं है। यह कदम निवेशकों की चिंताएं दूर करने का प्रयास है। उन्हें स्पष्ट रहना चाहिए कि इस संस्थान का नियंत्रण अपने पास रखने में हमारी दिलचस्पी नहीं है।