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जेटली ने सिंगल टैक्स स्लैब के साथ जीएसटी रेट घटाने का विरोध किया, ब्लॉग लिखकर सरकार को चेताया

Mon, 01 Jul 2019 02:02 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी दरों को घटाए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इससे रेवेन्यू कलेक्शन पर बुरा असर पड़ेगा। एक जुलाई को जीएसटी के दो साल पूरे होने पर जेटली ने एक ब्लॉग में यह बात कही। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार को जीएसटी की दरों में और कटौती नहीं करनी चाहिए। इससे सरकार के पास खर्च करने के लिए संसाधनों की कमी पड़ जाएगी। आने वाले बजट में जीएसटी दरों को कम करने के कयास लगाए जा रहे हैं।

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अभी जीएसटी दरें 5%, 12%, 18% और 28% हैं। मौजूदा समय में सरकार लग्जरी, हानिकारक और व्हाइट गुड्स पर सबसे ज्यादा 28% का टैक्स लगाती है। उन्होंने कहा कि जीएसटी से पहले राज्य सरकारें 35% से लेकर 110% टैक्स लगाती थीं। जीएसटी से पहले कई उत्पादों पर टैक्स 110% तक था। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स दरों को कम करने से पहले ही सालान 90,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। साथ ही उन्होंने कहा कि रेवेन्यू कलेक्शन बढ़ने पर 12 और 18% टैक्स स्लैब को मिलाया जा सकता है। 

चेतावनी : जीएसटी रेट में कटौती से खर्च करने के लिए संसाधनों की कमी पड़ जाएगी

सरकार ने कहा है कि जून में जीएसटी कलेक्शन 99,939 करोड़ रुपए रहा है जो मई माह के मुकाबले 350 करोड़ रुपए कम है। मई 2019 में जीएटी कलेक्शन 100,289 करोड़ रुपए रहा था। हालांकि जून 2018 में कर संग्रह 95,610 करोड़ रुपए रहा था। इस लिहाज से पिछले साल के मुकाबले इसमें 4.52% की बढ़ोतरी हुई है। जून माह में आए 99,939 करोड़ रुपए में सीजीएसटी 18,366 करोड़ रुपए, एसजीएसटी 25,343 करोड़ रुपए, आईजीएसटी 47,772 करोड़ रुपए रहा।

जीएसटीआर 3बी का अनुपालन करीब 60 फीसदी रहा 

जीएसटी लागू होने के दो साल बाद भी इनडायरेक्ट टैक्स के तहत रिटर्न फाइलिंग अनिश्चित रही है। हालांकि फाइिलंग डाटा से पता चलता है कि इसमें बढ़ोतरी हो रही है लेकिन यह उम्मीद से कम है। जीएसटीआर 3बी में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है क्योंकि बिजनेस इसे एक महीने बाद ही फाइल कर रहे हैं। इसमें अनुपालन करीब 60 फीसदी है। जीएसटी नियमों के मुताबिक देरी से रिटर्न फाइलिंग पर प्रतिदन 25 रुपए सीजीएसटी के हिसाब से और इतना ही एसजीएसटी के हिसाब से जुर्माना लगता है। 

जीएसटी के लागू होने के बाद आज तीसरे वर्ष में प्रवेश करने के मौके पर पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे बेहद सफल टैक्स सिस्टम करार दिया है। उन्होंने कहा है कि जीएसटी के विरुद्ध जितनी भी आशंकाएं व्यक्त की गई थीं, वे सब आधारहीन साबित हुई हैं। जीएसटी देश के सुधार के लिए बहुत अहम रहा है क्योंकि इसके लागू होने के बाद देश में कर देने वालों की संख्या में आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ोतरी हुई है।

आज एक करोड़ बीस लाख लोग दे रहे हैं टैक्स

पहले के 65 लाख लोगों के मुकाबले आज एक करोड़ बीस लाख लोग जीएसटी के तहत टैक्स दे रहे हैं। इससे केंद्र के साथ-साथ राज्यों की आय भी बढ़ी है और सरकारों के पास जनोपयोगी सेवाओं को बढ़ाने के लिए ज्यादा वित्तीय ताकत आई है। उन्होंने कहा है कि भारत जैसे देश के लिए एक राष्ट्र एक टैक्स का सिस्टम सही नहीं साबित हो सकता जहां भारी संख्या में आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है।

राज्यों की आय में 14 फीसदी की बढ़ोतरी

एक लेख के जरिए अपनी बात रखते हुए अरुण जेटली ने कहा है कि जीएसटी के लिए राज्यों को राजी करना बड़ा कठिन काम था, लेकिन अंततः लगातार पांच सालों तक उनकी आय में 14 फीसदी की बढ़ोतरी करने के वायदे के बाद इस मुद्दे पर सबको साथ लाया जा सका। लेकिन अब जबकि दो वर्ष के जीएसटी के आंकड़े सबके सामने आ चुके हैं, यह देखा गया है कि देश के बीस राज्यों ने 14 फीसदी से भी ज्यादा आय बढ़ोतरी हासिल किया है और अब उनके द्वारा अलग से फंड देने की आवश्यकता भी नहीं है। 

उपभोक्ता को देना पड़ता था 31 फीसदी तक टैक्स

जेटली के मुताबिक जीएसटी के लागू होने से पहले टैक्स को लेकर 17 कानून मौजूद थे। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रावधान होने के कारण व्यापारियों के साथ-साथ सरकारों को भी कष्ट देने वाला था। वैट 14.5 फीसदी, एक्साइज ड्यूटी 12.5 फीसदी सहित अनेक टैक्स लगते थे। इस व्यवस्था में उपभोक्ता को अंततः लगभग 31 फीसदी तक टैक्स देना पड़ता था। जबकि जीएसटी के लागू होने के बाद यह अधिकतम 28 फीसदी रह गया है। वह भी केवल कुछ उच्च विलासिता की वस्तुओं में। 

सही नहीं है एक टैक्स सिस्टम

भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा कि इस देश में कभी भी एक टैक्स सिस्टम को सही नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि जिस देश की बड़ी संख्या में आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती हो, वहां सबके लिए एक टैक्स निर्धारित करना किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि हवाई चप्पल और मर्सिडीज कार पर एक सामान टैक्स नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जीएसटी के कारण आज राज्यों के प्रवेश सीमा पर ट्रकों को अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ता। 

बन सकती है नई स्लैब

जेटली ने कहा कि कुछ वस्तुओं को छोड़कर अब ज्यादातर वस्तुओं को 12 फीसदी और 18 फीसदी के दायरे में लाया जा चुका है। भविष्य में इन दोनों सीमाओं को मिलाकर बीच में कहीं एक नई स्लैब बनाई जा सकती है। जहां तक घरेलू उपयोग की चीजों की बात है, उनमें से ज्यादातर को शून्य और पांच फीसदी के स्तर पर फिक्स कर दिया गया है। इससे गरीबों के ऊपर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। 

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