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Chabahar port: चाबहार परियोजना पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर? सरकार ने संसद को दी स्थिति की जानकारी

Thu, 05 Feb 2026 07:43 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने संसद को बताया कि चाबहार पोर्ट परियोजना पर अमेरिकी प्रतिबंधों में बदलाव के असर को लेकर भारत सभी संबंधित पक्षों से लगातार बातचीत कर रहा है। भारत ने परियोजना के लिए 120 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता पूरी कर दी है। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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चाबहार पोर्ट - फोटो : फाइल।
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विस्तार
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सरकार ने गुरुवार को संसद में चाबहार पोर्ट परियोजना को लेकर अहम जानकारी दी। सरकार ने कहा कि भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों/टैरिफ नीतियों में हालिया बदलावों के असर को लेकर सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संवाद में है।

पिछले पांच वर्षों में क्या रही स्थिति?

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से पूछा था कि क्या इन बदलावों के प्रभाव का आकलन किया गया है और पिछले पांच वर्षों में परियोजना के विकास व संचालन के लिए भारत ने कितनी धनराशि प्रतिबद्ध और खर्च की है।

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लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि 13 मई 2024 को इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन और उपकरणों की आपूर्ति को लेकर मुख्य अनुबंध हुआ था। इसके तहत भारत ने पोर्ट उपकरणों की खरीद के लिए 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अपना दायित्व पूरा कर दिया है। अंतिम किस्त 26 अगस्त 2025 को ट्रांसफर की गई।

खरगे ने परियोजना से संबंधित किन कड़ियों के बारे में पूछा?

खरगे ने यह भी जानना चाहा था कि क्या पिछले दो वर्षों में इस परियोजना को लेकर अमेरिका या अन्य साझेदारों से कोई कूटनीतिक बातचीत हुई है और भारत की भागीदारी जारी रखने के लिए कौन-सी आपात योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

भारत सरकार सभी संबंधित पक्षों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई

मंत्री ने बताया कि 16 सितंबर 2025 को अमेरिकी विदेश विभाग ने 2018 में ईरान फ्रीडम एंड काउंटर प्रोलिफरेशन एक्ट, 2012 के तहत अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए दी गई प्रतिबंध-छूट को 29 सितंबर 2025 से प्रभावी रूप से वापस लेने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिका के साथ चर्चा के बाद शर्तों के साथ यह छूट 26 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई गई। मंत्री ने कहा कि इन घटनाक्रमों के निहितार्थों से निपटने के लिए भारत सरकार सभी संबंधित पक्षों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।

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