पीयूष गोयल ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर निवेश के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि भारत निवेश नहीं, बल्कि जरूरत के तहत अमेरिका से आयात और सोर्सिंग बढ़ाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं।
उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत की ओर से अमेरिका में किसी निवेश की कोई प्रतिबद्धता नहीं की गई है। हालांकि, 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ते भारत को आने वाले वर्षों में अमेरिका से बड़ी मात्रा में ऊर्जा, डेटा सेंटर उपकरण, आईसीटी उत्पाद और अन्य वस्तुओं की जरूरत होगी। यह बात उन्होंने दिल्ली में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान कही।
गोयल ने कहा कि अमृतकाल के दौरान भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ स्टील क्षमता मौजूदा 140 मिलियन टन से बढ़कर अगले कुछ वर्षों में करीब 300 मिलियन टन तक पहुंचने की योजना है। इसी तरह, ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। उनके अनुसार, अगले पांच वर्षों में भारत अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के सामान का आयात कर सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत की अमेरिका से होने वाली विमान खरीद मौजूदा और प्रस्तावित ऑर्डर करीब 70 से 80 अरब डॉलर की है। इंजनों और स्पेयर पार्ट्स को जोड़ने पर यह खर्च 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, बजट में डेटा सेंटरों को दी गई टैक्स हॉलिडे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर डेटा सेंटरों में 100 से 150 अरब डॉलर का निवेश आता है, तो उनके लिए आवश्यक उपकरणों की मांग भी बड़े पैमाने पर होगी।
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात करते हुए गोयल ने कहा कि फरवरी 2025 में औपचारिक रूप से प्रस्तावित इस समझौते का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। इसके लिए दोनों देशों को निर्यात और सोर्सिंग दोनों मोर्चों पर प्रयास बढ़ाने होंगे।
गोयल ने यह भी बताया कि बीटीए का पहला चरण लगभग तैयार है और अगले चार-पांच दिनों में एक संयुक्त बयान जारी होने की उम्मीद है। इसके बाद मार्च के मध्य तक कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि संयुक्त बयान के बाद अमेरिका की ओर से कार्यकारी आदेश के जरिए टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में टैरिफ कार्यकारी आदेश से तय होते हैं, जबकि भारत में एमएफएन (सबसे प्रिय राष्ट्र) टैरिफ में कटौती केवल कानूनी समझौते के बाद ही संभव है।