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India-US Trade: अमेरिका में 500 अरब डॉलर निवेश के दावे को गोयल ने किया खारिज, आयात बढ़ने की जताई संभावना

Thu, 05 Feb 2026 06:14 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीयूष गोयल ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर निवेश के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि भारत निवेश नहीं, बल्कि जरूरत के तहत अमेरिका से आयात और सोर्सिंग बढ़ाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं। 

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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत की ओर से अमेरिका में किसी निवेश की कोई प्रतिबद्धता नहीं की गई है। हालांकि, 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ते भारत को आने वाले वर्षों में अमेरिका से बड़ी मात्रा में ऊर्जा, डेटा सेंटर उपकरण, आईसीटी उत्पाद और अन्य वस्तुओं की जरूरत होगी। यह बात उन्होंने दिल्ली में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान कही।

अगले पांच वर्षों में भारत अमेरिका से कितने सामान का आयात करेगा?

गोयल ने कहा कि अमृतकाल के दौरान भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ स्टील क्षमता मौजूदा 140 मिलियन टन से बढ़कर अगले कुछ वर्षों में करीब 300 मिलियन टन तक पहुंचने की योजना है। इसी तरह, ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। उनके अनुसार, अगले पांच वर्षों में भारत अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के सामान का आयात कर सकता है।

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यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में एक व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया था कि भारत ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। इस पर सफाई देते हुए गोयल ने कहा कि यह निवेश प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि संभावित सोर्सिंग और खरीद का आकलन है।

भारत-अमेरिका के बीच हुई डील के आंकड़े

उन्होंने बताया कि भारत की अमेरिका से होने वाली विमान खरीद मौजूदा और प्रस्तावित ऑर्डर करीब 70 से 80 अरब डॉलर की है। इंजनों और स्पेयर पार्ट्स को जोड़ने पर यह खर्च 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, बजट में डेटा सेंटरों को दी गई टैक्स हॉलिडे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर डेटा सेंटरों में 100 से 150 अरब डॉलर का निवेश आता है, तो उनके लिए आवश्यक उपकरणों की मांग भी बड़े पैमाने पर होगी।

समझौते का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यपार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात करते हुए गोयल ने कहा कि फरवरी 2025 में औपचारिक रूप से प्रस्तावित इस समझौते का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। इसके लिए दोनों देशों को निर्यात और सोर्सिंग दोनों मोर्चों पर प्रयास बढ़ाने होंगे।

गोयल ने यह भी बताया कि बीटीए का पहला चरण लगभग तैयार है और अगले चार-पांच दिनों में एक संयुक्त बयान जारी होने की उम्मीद है। इसके बाद मार्च के मध्य तक कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि संयुक्त बयान के बाद अमेरिका की ओर से कार्यकारी आदेश के जरिए टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में टैरिफ कार्यकारी आदेश से तय होते हैं, जबकि भारत में एमएफएन (सबसे प्रिय राष्ट्र) टैरिफ में कटौती केवल कानूनी समझौते के बाद ही संभव है।

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गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2025 से भारत समेत प्रमुख निर्यातक देशों पर सख्त टैरिफ लगाए थे, जिनके तहत भारत से अमेरिका जाने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लागू किया गया था। अब नेताओं के बीच हालिया बातचीत के बाद इन्हें घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
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