भारत को लेकर क्या है एपल की प्लानिंग?
अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध के बीच बीते कुछ समय में एपल ने चीन से इतर भारत में अपनी उत्पादन क्षमता विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। कंपनी ने अगले साल के अंत तक अमेरिका में आपूर्ति की जाने वाली आईफोन की बड़ी हिस्सेदारी भारत में तैयार करने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, अब ट्रंप की ताजा बयानबाजी से कंपनी एक बार फिर दुविधा में आ सकती है। क्योंकि बीते कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन की तनातनी से कंपनी पहले से कई मोर्चों पर परेशानी का सामना कर रही है।
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एपल से जुड़े सूत्रों के अनुसार कंपनी का लक्ष्य का लक्ष्य 2026 के अंत तक अमेरिका में बेचे जाने वाले अपने अधिकांश आईफोन को भारत के कारखानों में तैयार करना है। एपल अमेरिका में हर साल 6 करोड़ से अधिक आईफोन बेचता है, फिलहाल इनमें से लगभग 80% वर्तमान में चीन में बनते हैं। एपल अपने मुख्य विनिर्माण आधार चीन में टैरिफ अनिश्चितता बढ़ने के बाद वहां से अपना विनिर्माण भारत समेत अन्य देशों में स्थानांरित करने की योजना पर काम कर रहा है।
भारत में आईफोन निर्माण पर विशेषज्ञों की क्या राय?
एसएंडपी ग्लोबल के विश्लेषण के अनुसार, 2024 में अमेरिका में आईफोन की बिक्री 75.9 मिलियन यूनिट थी, जिसमें मार्च में भारत से निर्यात 3.1 मिलियन यूनिट का निर्यात किया गया। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया है, "एपल का भारतीय निर्यात पहले से ही मुख्य रूप से अमेरिका की ओर जा रहा है, जो 28 फरवरी 2025 तक तीन महीनों में फर्म की ओर से निर्यात किए गए फोन का 81.9 प्रतिशत है। निर्यात में 219 प्रतिशत की वृद्धि के परिणामस्वरूप मार्च 2025 में यह बढ़कर 97.6 प्रतिशत हो गया, जो संभवतः फर्म द्वारा उच्च टैरिफ से बचने की कोशिश को जाहिर करता है।"
टिम कुक, डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : Amar Ujala
ट्रंप का बड़बोलापन एपल की योजना पर कितना भारी?
इस बीच, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अप्रैल में घोषणा की थी कि वित्त वर्ष 2025 में भारत से 1.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के आईफोन निर्यात किए जाएंगे। भारत में एप्पल इकोसिस्टम देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला है। अनुमान है कि इसने देश के विभिन्न विक्रेताओं के जरिए करीब 2 लाख लोगों को रोजगार दिया है। अमेरिका में ट्रंप सरकार की वापसी के बाद ट्रम्प की ओर से लगाए गए टैरिफ और साथ ही बीजिंग-वाशिंगटन तनाव के कारण एपल ने भारत में अपना उत्पादन और बढ़ाने की कवायद शुरू की थी। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप की नई बयानबाजी ने एपल के भविष्य की योजनाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।
फिलहाल, भारत में कहां-कहां बन रहे आईफोन?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आईफोन के वैश्विक उत्पादन का 15 प्रतिशत से अधिक भारत से आता है। फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पेगाट्रॉन इंडिया (मुख्य रूप से टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के स्वामित्व वाली) आईफोन के निर्माण में लगी हुई हैं। फॉक्सकॉन ने निर्यात के लिए तेलंगाना में एप्पल एयरपॉड्स का निर्माण भी शुरू कर दिया है। फॉक्सकॉन और टाटा, जो भारत में एपल के दो मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं, के पास कुल तीन कारखाने हैं, साथ ही दो और तैयार किए जा रहे हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा संचालित एक नए आईफोन असेंबली प्लांट ने हाल ही में तमिलनाडु के होसुर में उत्पादन शुरू किया है।
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मामले से परिचित एक सूत्र के अनुसार, फैक्ट्री वर्तमान में पुराने आईफोन मॉडल को एक ही लाइन पर असेंबल कर रही है। दूसरी ओर, ताइवान से एपल के लंबे समय के विनिर्माण भागीदार फॉक्सकॉन की ओर से बनाया जा रहा 2.6 बिलियन डॉलर का प्लांट- बेंगलुरु में परिचालन के लिए तैयार है। बेंगलुरू में फॉक्सकॉन संयंत्र का निर्माण दिसंबर 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे अंततः 50,000 नौकरियां पैदा होंगी।
एपल सीईओ टिम कुक पीएम मोदी के साथ।
- फोटो : ANI
ट्रंप की बयानबाजी पर एपल के अधिकारियों की क्या है प्रतिक्रिया?
आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल की भारत में निवेश की योजना बरकरार है और कंपनी देश में अपने उत्पादों के लिए एक बड़ा विनिर्माण केंद्र बनाने का प्रस्ताव कर रही है। यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से यह बयान दिए जाने के तुरंत बाद कि उन्होंने एप्पल के सीईओ टिम कुक से भारत में विनिर्माण में कटौती करने को कहा है, भारतीय अधिकारियों ने क्यूपर्टिनो स्थित कंपनी के अधिकारियों से बात की। एप्पल के अधिकारियों ने भारत सरकार के अधिकारियों को आश्वासन दिया है कि कंपनी की निवेश योजनाएं बरकरार हैं और यह देश एप्पल का प्रमुख विनिर्माण केंद्र बनेगा। सूत्रों के अनुसार एप्पल ने कहा है कि भारत में उसकी निवेश योजनाएं बरकरार हैं और वह भारत को अपने उत्पादों के लिए प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में जारी रखेगा।