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आम लोगों को राहत, अगस्त में 1.08 फीसदी रही थोक महंगाई दर

Mon, 16 Sep 2019 05:47 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगस्त महीने में बिना किसी बदलाव के 1.08 प्रतिशत पर स्थिर रही है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक की अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती की उम्मीद और मजबूत हुई है।

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रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक समीक्षा के वक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति को ही तव्वजो देता है। विशेषज्ञों के अनुसार हालांकि, मुख्य मुद्रास्फीति में गिरावट से नीतिगत दरों में कटौती की बात और मजबूत हुई है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार खाने-पीने की कुछ वस्तुओं का महंगे होना बेअसर रहा क्योंकि अगस्त के दौरान विनिर्मित वस्तुओं के दाम में स्थिरता रही।अगस्त में थोक मूल्य सचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर जुलाई के समान ही 1.08 प्रतिशत रही। हालांकि, एक साल पहले अगस्त 2018 में यह 4.62 प्रतिशत थी।
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खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर अगस्त में बढ़कर 7.67 प्रतिशत पहुंच गयी जो इस साल जुलाई में 6.15 प्रतिशत थी। मुख्य रूप से सब्जी और अंडा, मांस जैसे अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़ी है।

सब्जियों की महंगाई दर भी आलोच्य महीने में बढ़कर 13.07 प्रतिशत पर पहुंच गयी जो इससे पूर्व इसी वर्ष जुलाई में 10.67 प्रतिशत थी। अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति अगस्त महीने में बढ़कर 6.60 प्रतिशत पर पहुंच गयी जो जुलाई में 3.16 प्रतिशत थी।

हालांकि, ईंधन और बिजली की महंगाई दर में 4 प्रतिशत की गिरावट आयी। जुलाई में 3.64 प्रतिशत थी। विनिर्मित वस्तुओं में मुद्रास्फीति दर शून्य प्रतिशत रही जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 0.34 प्रतिशत रहा था।

रेटिंग एजेंसी इक्रा की अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, अगस्त में प्रमुख थोक मुद्रास्फीति में कमजोरी व्यापक है। 15 उप-क्षेत्रों में सिलसिलेवार मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गयी है वहीं इनमें से नौ क्षेत्रों में सालाना आधार पर भी मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गई है। 

उन्होंने कहा कि उत्पादकों की कीमतें तय करने की क्षमता मजबूत होने की संभावना नहीं दिखती, वहीं तात्कालिक संदर्भ में कच्चे तेल की कीमतें भी नीचे ही बने रहने की उम्मीद है। ऐसे में प्रमुख थोक मुद्रास्फीति साल के अंत तक शून्य बने रहने का अनुमान है।

पिछले हफ्ते जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति मामूली तौर पर बढ़कर 3.21 प्रतिशत रही जो जुलाई में 3.15 प्रतिशत थी। इसकी प्रमुख वजह खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ना है। हालांकि, यह रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के दायरे से कम है।

 
 

जून में 2.02 फीसदी थी थोक महंगाई दर 

इससे पहले जून में थोक महंगाई दर पिछले 23 महीनों के निम्न स्तर पर 2.02 फीसदी पर आ गई थी। वहीं पिछले साल जून में थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति 5.68 फीसदी पर रही थी। तब लगातार तीसरे महीने महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गई थी। 

अगस्त में सब्जियों ने बढ़ा दी महंगाई दर

सरकार की तरफ से गुरुवार को अगस्त में खुदरा महंगाई और जुलाई के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों को जारी किया गया था। अगस्त में खुदरा महंगाई 3.21 फीसदी पर रही है। यह जुलाई में 3.15 फीसदी थी। महंगाई दर में इजाफे के लिए सब्जियों की कीमतें जिम्मेदार रही हैं। महीने दर महीने आधार पर जुलाई में सब्जियों की महंगाई दर 2.82 फीसदी से बढ़कर 6.90 फीसदी पर पहुंच गई है जबकि बिजली और ईंधन की महंगाई दर जुलाई के -0.36 फीसदी के मुकाबले -1.7 फीसदी रही है।

अगस्त में हाउसिंग महंगाई दर 4.87 फीसदी से घटकर 4.84 फीसदी पर रही है। वहीं इसी अवधि में खाद्यानों की खुदरा महंगाई दर जुलाई के 1.31 फीसदी के मुकाबले 1.30 फीसदी रही है। जूतों और कपड़ों की खुदरा महंगाई दर 6.65 फीसदी से घटकर 1.23 फीसदी पर रही है। दालों की महंगाई दर पिछले महीने के 6.82 फीसदी से बढ़कर 6.94 फीसदी रही है।  कंज्यूमर, फूड प्राइस महंगाई दर जुलाई के 2.6 फीसदी से बढ़कर 2.99 फीसदी पर आ गया है। 

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