केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने बुधवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, इसके प्रमोटर अनिल अंबानी और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है। यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम को कथित तौर पर 3,750 करोड़ रुपये का गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है। यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब अनिल अंबानी पहले से ही कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ भारी धोखाधड़ी के मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
अधिकारियों के बयान के अनुसार, यह नया मामला एलआईसी की ओर से मिली शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। इसमें साजिश, धोखाधड़ी, पैसों की हेराफेरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य, सुरक्षा और परिसंपत्ति कवर के बारे में झूठे दावे किए। इन भ्रामक जानकारियों के आधार पर एलआईसी को 4,500 करोड़ रुपये के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर खरीदने के लिए धोखे से प्रेरित किया गया।
एलआईसी की यह शिकायत बीडीओ इंडिया एलएलपी की ओर से 15 अक्तूबर, 2020 को की गई एक फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट पर आधारित है। इस रिपोर्ट में कंपनी के वित्तीय संचालन में कई गंभीर गड़बड़ियों को उजागर किया गया है।
इस पूरे मामले का प्रभाव केवल एलआईसी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश का व्यापक बैंकिंग सेक्टर भी इसके दायरे में है। सीबीआई ने इससे पहले आरकॉम, अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ बैंकों से धोखाधड़ी करने के आरोप में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए थे।
मामले की जांच अभी प्रगति पर है। 2,929.05 करोड़ रुपये के एसबीआई धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में अनिल अंबानी से सीबीआई के दिल्ली मुख्यालय में लगातार दो दिनों तक पूछताछ की जा चुकी है। इसके अलावा, पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित कई अन्य बैंकों ने भी अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। 24 फरवरी की शिकायत के आधार पर 25 फरवरी को बैंक ऑफ बड़ौदा के एक्सपोजर (जिसमें ई-देना और ई-विजया बैंक शामिल हैं) के संबंध में भी एक और मामला दर्ज किया गया है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, एलआईसी और सार्वजनिक बैंकों के धन की भारी हेराफेरी के इस मामले में नई परतें खुल रही हैं। यह 3,750 करोड़ रुपये का नया एलआईसी घोटाला कॉरपोरेट ऋणों और निवेशों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आगे की सीबीआई जांच तय करेगी कि इन वित्तीय अनियमितताओं में और किन सरकारी कर्मियों की भूमिका रही है।