रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत एजेंसी ने बुधवार को ग्रुप की 1,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की नई संपत्तियां जब्त कर ली हैं। इस ताजा कार्रवाई के साथ ही इस मामले में अब तक कुल 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
क्या है 'पैसों की हेराफेरी' का आरोप?
ईडी की जांच में सार्वजनिक धन के 'फर्जीवाड़े और डायवर्जन' की बात सामने आई है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है:
1. यस बैंक कनेक्शन
आरोप है कि रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड ने सेबी के कड़े नियमों से बचने के लिए सीधे अपनी ग्रुप कंपनियों में पैसा नहीं लगाया। इसके बजाय, उन्होंने यह पैसा यस बैंक के जरिए रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस तक पहुचाया। बाद में यह पैसा डूब गया और लोन 'नॉन-परफॉर्मिंग' यानी एनपीए हो गए।