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Tariff: टैरिफ से आंध्र के झींगा निर्यात को हो सकता है ₹25000 करोड़ का नुकसान, CM नायडू ने केंद्र से मांगी मदद

Mon, 15 Sep 2025 02:53 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि इससे राज्य के झींगा निर्यात को 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। नायडू ने केंद्र से जलीय कृषि उत्पादों के घरेलू उपयोग को बढ़ाने, जीएसटी, वित्त और अन्य में लचीलापन लाने के उपाय करके जलीय कृषि क्षेत्र को बचाने का भी अनुरोध किया।
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एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिकी टैरिफ से आंध्र प्रदेश के झींगा निर्यात को 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसे लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत तक निर्यात ऑर्डर रद्द हो गए हैं।

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निर्यात पर 600 करोड़ रुपये तक का कर लगा

नायडू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह को पत्र लिखा। मुख्यमंत्री ने दक्षिणी राज्य के जलीय कृषि क्षेत्र के समक्ष आ रही कठिनाइयों पर प्रकाश डाला और उनसे सहयोग का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, 2,000 कंटेनरों के माध्यम से होने वाले निर्यात पर 600 करोड़ रुपये तक का कर लगाया गया है।

झींगा निर्यात में आंध्र प्रदेश का योगदान 80 प्रतिशत 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के झींगा निर्यात में आंध्र प्रदेश का योगदान 80 प्रतिशत और समुद्री निर्यात में 34 प्रतिशत है। इसका मूल्य लगभग 21,246 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष है। उन्होंने बताया कि 2.5 लाख परिवार और संबद्ध क्षेत्रों के 30 लाख से अधिक लोग जलीय कृषि क्षेत्र पर निर्भर हैं।

आंध्र सरकार ने किसानों को समर्थन देने के उपाय किए 

इस संकट के बीच, नायडू ने कहा कि उनकी सरकार ने जलीय कृषि किसानों को समर्थन देने के लिए कदम उठाए हैं। इसके तहत जलीय कृषि चारा निर्माताओं से कीमतों में 9 रुपये प्रति किलोग्राम की कटौती करवाई गई है और सब्सिडी वाले बिजली ट्रांसफार्मर की आपूर्ति पर विचार किया जा रहा है।

केंद्र से आपूर्ति शृंखला को सहारा देने का किया अनुरोध 

उन्होंने केंद्र से जलीय कृषि उत्पादों के घरेलू उपयोग को बढ़ाने, जीएसटी, वित्त और अन्य में लचीलापन लाने के उपाय करके जलीय कृषि क्षेत्र को बचाने का भी अनुरोध किया। इसके अलावा, उन्होंने 100 करोड़ रुपये का एक कोष स्थापित करने, शीत भण्डारों और स्वच्छ मछली एवं समुद्री खाद्य बाजारों की स्थापना करने का आह्वान किया। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार किसानों को सीधे बाजार तक आपूर्ति शृंखला की सुविधा प्रदान करने के लिए आंध्र प्रदेश झींगा उत्पादक समन्वय समिति की स्थापना करने के लिए तैयार है।

समुद्री खाद्य उपभोग को बढ़ावा देने पर जोर 

मुख्यमंत्री ने समुद्री खाद्य उपभोग को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने बताया कि जलीय कृषि उत्पाद प्रोटीन से भरपूर व अत्यधिक पौष्टिक होते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति समुद्री खाद्य उपभोग केवल 12 से 13 किलोग्राम प्रति वर्ष है, जबकि वैश्विक औसत 20-30 किलोग्राम है।

किसान क्रेडिट कार्ड के तहत टॉप-अप ऋण देने की मांग

परिवहन को बढ़ावा देने के लिए, नायडू ने केंद्र सरकार से दक्षिण भारत से देश के विभिन्न भागों में जलीय कृषि उत्पादों की शिपिंग के लिए समर्पित रेलगाड़ियां चलाने का अनुरोध किया।उन्होंने मछुआरा समुदाय के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के तहत एक लाख रुपये का एकमुश्त टॉप-अप ऋण देने की मांग की। साथ ही नए बाजारों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए प्रसंस्करण, पैकेजिंग और कोल्ड-चेन सुविधाओं को मजबूत करने का आह्वान किया। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह आईसीएआर-सीआईबीए और आईसीएआर-एनबीएफजीआर जैसे प्रमुख अनुसंधान संस्थानों के क्षेत्रीय कार्यालय आंध्र प्रदेश में स्थापित करे।

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