आरबीआई आगामी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रख सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक की ओर से रुख को तटस्थ बनाए रखने की उम्मीद है।
इसमें कहा गया है कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो बाजार की उम्मीदों से अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार शहरी खपत में सुधार और ग्रामीण मांग में मजबूती के चलते तीसरी तिमाही में भी यह गति जारी रहने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि क्रेडिट मांग में तेजी के कारण निजी निवेश में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि कीमतों का दबाव काफी कम हुआ है। खाद्य कीमतों में लगातार गिरावट के कारण, अक्तूबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति घटकर 0.25 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई। महंगाई में और कमी आने की उम्मीद है और यह RBI के अपने अनुमानों से भी नीचे आ सकती है।
रिपोर्ट में खाद्य मुद्रास्फीति के बेहतर परिदृश्य का श्रेय पर्याप्त वर्षा, समय पर आपूर्ति पक्ष के उपायों और बेहतर उत्पादन प्रवृत्तियों को दिया गया है। हालांकि मुख्य मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, लेकिन इसका मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें हैं, न कि मजंबूत मांग। कम जीएसटी दरों के लाभों से इसका प्रभाव आंशिक रूप से कम हो गया है।
संभावित ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश के बावजूद, रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई आगामी बैठक में सतर्कता बरत सकता है, खासकर तब जब विकास दर मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आगे चलकर और अधिक मौद्रिक सहायता की जरूरत पड़ सकती है, खासकर अगर मौजूदा टैरिफ-संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं। मौजूदा दर को बनाए रखने से पिछली दरों में कटौती के प्रभावों को पूरी तरह से प्रणाली में लागू होने के लिए अधिक समय मिलेगा। हाल के आर्थिक संकेतकों को देखते हुए, रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि एमपीसी अपने विकास अनुमानों को बढ़ाएगी। साथ ही, मुद्रास्फीति के अनुमानों में भी कमी आने की संभावना है।