मंदी की मार झेल रहे मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को बड़ा झटका लगा है। डीजीएफटी (डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड) ने अपनी साइट से एमईआईएस (फोकस) लाइसेंस के कॉलम को हटा लिया है। इसके तहत निर्यातकों को एक्सपोर्ट पर पांच से सात फीसदी तक की प्रोत्साहन राशि केंद्र सरकार से मिलती थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इसे खत्म करने के लिए लगातार डब्ल्यूटीओ पर दबाव बना रहे थे। सरकार के इस कदम से मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा।
निर्यातकों को कारोबारी आदेश मुख्य तौर पर अंतरराष्ट्रीय मेलों से मिलते हैं। देश में हस्तशिल्प के लिए ईपीसीएच साल में दो बार इंटरनेशनल फेयर का आयोजन करता है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में फरवरी और अक्तूबर में दिल्ली फेयर का आयोजन होता है।
इसमें दुनिया के करीब 125 देशों के खरीददार हिस्सा लेते हैं। अभी निर्यातक जो उत्पाद बनाकर निर्यात कर रहे हैं उनके ऑर्डर फरवरी फेयर में मिले थे। निर्यातकों का कहना है कि यदि सरकार यह साफ कर देती थी कि एमईआईएस लाइसेंस को बीच में खत्म कर दिया जाएगा तो वह अपने उत्पादों के दाम बढ़ाकर कारोबार करते। निर्यातक कारोबार करते समय एमईआईएस और ड्रा बैक को मुनाफे के तौर पर जोड़कर उत्पादों के दाम तय करते हैं। अक्तूबर तक होने वाले निर्यात पर निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ेगा।