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'बागडोर सौंपने का सही समय': इस्तीफा देकर एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ऐसा क्यों बोले? जानिए अंदर की कहानी

Tue, 07 Apr 2026 05:12 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने इस्तीफा देने का फैसला ले लिया है। उन्होंने सही समय आ गया है कहते हुए अपने कार्यकाल की उपलब्धियां भी गिनाईं हैं। जानें इस बड़े बदलाव के पीछे की असली वजहें, वित्तीय घाटा और चुनौतियां क्या हैं। 
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एअर इंडिया के सीईओ का इस्तीफा। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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टाटा समूह के स्वामित्व वाली विमानन कंपनी एअर इंडिया में एक बड़े बदलाव की घोषणा हुई है। भारी वित्तीय घाटे और पिछले साल हुए एक बड़े विमान हादसे के बाद बढ़ी विनियामक सख्ती के बीच, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विल्सन ने अपने इस कदम को एअर इंडिया के विकास के अगले चरण के लिए सही समय बताया है। 

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कैंपबेल विल्सन ने अपने इस्तीफे पर क्या कहा, इसके पीछे की असली कहानी क्या हैं और एयरलाइन का आगे का रास्ता क्या होगा। जानिए सबकुछ।

क्या अचानक हुआ यह फैसला?

भले ही एअर इंडिया के सीईओ का इस्तीफा अभी आया है, लेकिन यह कोई रातों-रात लिया गया फैसला नहीं है। विल्सन का मूल कार्यकाल 2027 में समाप्त होने वाला था, लेकिन उन्होंने साल 2024 में ही एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को 2026 में पद छोड़ने की इच्छा के बारे में बता दिया था। विल्सन फिलहाल छह महीने के नोटिस पीरियड पर हैं और जब तक कंपनी को उनका उत्तराधिकारी नहीं मिल जाता, तब तक वह अपना कार्यभार संभालते रहेंगे। नए सीईओ की तलाश के लिए एक विशेष पैनल का गठन कर दिया गया है।

इस्तीफे पर क्या बोले कैंपबेल विल्सन?

अपने विदाई संदेश में विल्सन ने एअर इंडिया के निजीकरण के बाद के चार वर्षों की उपलब्धियों को साझा किया। विल्सन ने क्या-क्या कहा जानिए।

  • बड़े बदलाव: कंपनी ने इन चार वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र से निकलकर कॉरपोरेट कार्यसंस्कृति अपनाई, चार अलग-अलग एयरलाइंस का सफल विलय किया और बेड़े में 100 नए विमानों को शामिल किया। 
  • नई शुरुआत: इसके अलावा, दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी ट्रेनिंग एकेडमी, दो फ्लाइट सिम्युलेटर, एक फ्लाइंग स्कूल और मरम्मत (एमआरओ) बेस जैसी बुनियादी चीजों का निर्माण भी शुरू किया गया। 
  • भविष्य की कमान: विल्सन ने कहा, "चूंकि 2027 से हमारे 600 विमानों के बड़े ऑर्डर की डिलीवरी शुरू होने वाली है, ऐसे में एअर इंडिया की उड़ान के अगले चरण के लिए बागडोर किसी और को सौंपने का मेरे लिए यही सही समय है"। उन्होंने इस ऐतिहासिक एयरलाइन की विकास यात्रा का हिस्सा बनने को अपने लिए सच्चा सम्मान बताया।

इस्तीफे के पीछे की असली चुनौतियां क्या हैं?

विल्सन ने जहां कंपनी के सकारात्मक पहलुओं के बारे में बात की, वहीं उनके इस फैसले का कारण कुछ गंभीर आर्थिक और ढांचागत चुनौतियां भी हैं:

  • भारी भरकम घाटा: साल 2022 में टाटा समूह द्वारा खरीदे जाने के बाद से ही एअर इंडिया वित्तीय दबाव में है। वित्त वर्ष 2024-2025 में एअर इंडिया और इसकी किफायती सेवा एअर इंडिया एक्सप्रेस को मिलाकर कुल 9,808 करोड़ रुपये (1.05 अरब डॉलर) का भारी घाटा हुआ है।
  • जियोपॉलिटिकल तनाव: पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद करने और ईरान युद्ध के खिंचने से पश्चिमी देशों के मुनाफे वाले रूट पर एयरलाइन का संचालन काफी मुश्किल और महंगा हो गया है।
  • विनियामक सख्ती: पिछले साल हुए एक बड़े विमान हादसे में 260 लोगों की जान जाने के बाद से एयरलाइन लगातार कड़े रेगुलेटरी दबाव का सामना कर रही है।

टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन क्या बोले?

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने विल्सन के पिछले चार वर्षों के नेतृत्व की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि विल्सन और उनकी टीम ने कोविड-19 के बाद उपजी सप्लाई चेन की समस्याओं और गंभीर भू-राजनीतिक चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया और नई एअर इंडिया की नींव रखी। कैंपबेल विल्सन की विदाई के साथ एअर इंडिया के बदलाव के एक अहम चरण का अंत हो गया है।

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