आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब व्यवसायों के लिए सिर्फ एक अतिरिक्त तकनीकी परत नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से वैश्विक उद्यमों के लिए बुनियादी ढांचा बनता जा रहा है। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कंपनी की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में यह बात कही है। एआई के दम पर शानदार वित्तीय नतीजे और नई भर्तियों में वापसी इस बात का संकेत है कि आईटी सेक्टर में बड़े बदलाव का दौर शुरू हो चुका है।
चंद्रशेखरन ने बताया कि टीसीएस ने अपने ह्यूमन+एआई परेटिंग मॉडल के विस्तार में बड़ी सफलता हासिल की है। इस मॉडल के तहत कंपनी ने एआई सेवाओं से 2.3 अरब डॉलर और नई पीढ़ी की सेवाओं (जिसमें क्लाउड, डेटा और साइबर सुरक्षा शामिल हैं) से 11.5 अरब डॉलर का सालाना राजस्व हासिल किया है। चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि जेनरेटिव और एजेंटिक एआई अब विकास के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं; ग्राहक अब इसके छोटे प्रयोगों (पायलट प्रोजेक्ट्स) से आगे बढ़कर इसे अपने मुख्य कामकाज का स्थायी हिस्सा बना रहे हैं।
भविष्य की रणनीति पर जोर देते हुए टीसीएस एक सुरक्षित और संप्रभु एआई ढांचा स्थापित करने जा रही है। इसके तहत कंपनी की अहम योजनाएं इस प्रकार हैं:
टीसीएस ने अपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के शानदार नतीजे भी पेश किए हैं। मुनाफे के बढ़े हुए मार्जिन के कारण मार्च तिमाही (Q4) में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 12.22 प्रतिशत के उछाल के साथ 13,718 करोड़ रुपये हो गया है। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी का शुद्ध मुनाफा 1.35 प्रतिशत बढ़कर 49,210 करोड़ रुपये रहा (जो बीते वित्त वर्ष में 48,553 करोड़ रुपये था)। इसके अलावा:
सीईओ और प्रबंध निदेशक के कृतिवासन ने कहा कि इसके शीर्ष 139 ग्राहकों में से 130 ने पहले ही इसे अपने एआई सेवा भागीदार के रूप में चुन लिया है। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस का लक्ष्य विश्व की सबसे बड़ी एआई-आधारित प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी बनना है। कंपनी की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को लिखे अपने पत्र में कृतिवासन ने लिखा, "वित्त वर्ष 2026 उद्यम एआई के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि ग्राहकों ने प्रयोगात्मक पायलटों से बड़े पैमाने पर तैनाती की ओर निर्णायक रूप से कदम बढ़ाया।"
टीसीएस का यह वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की एआई केंद्रित रणनीति यह स्पष्ट करती है कि एआई अब व्यवसायों के निवेश, सप्लाई चेन और रिस्क मैनेजमेंट को गहराई से प्रभावित करेगा। भारत में 160 केवी से अधिक क्षमता वाले एआई डेटा सेंटर का निर्माण और वैश्विक मांग को पूरा करने की तैयारी देश को तकनीक और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भविष्य का प्रमुख केंद्र बना सकती है।