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भारत की शर्तों से आरसीईपी समझौते पर खतरा, आगामी सप्ताह बैंकॉक में बैठक प्रस्तावित

Thu, 31 Oct 2019 11:28 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर
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आगामी सप्ताह बैंकॉक में 16 एशियाई देशों की व्यापारिक बैठक के दौरान रीजनल कंम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) की घोषणा होनी थी। लेकिन अब अंतिम समय में भारत द्वारा अतिरिक्त शर्तों को रखने से एशियाई देशों के बीच होने वाले क्षेत्रीय समझौते की घोषणा मुश्किल में पड़ गई है। 

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बता दें कि भारत ने अतिरिक्त शर्तें रखीं, जिससे नेगोशिएटर्स नाराज हुए। इस संदर्भ में सूत्रों ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के एसोसिएशन ने चार नवंबर को होने वाली बैठक में शुरुआती डील की घोषणा करने की योजना बनाई थी। नेगोशिएटर्स ने उम्मीद जताई है कि बैंकॉक में होने वाली बैठक में वे आरसीईपी पर टैरिफ को कम करने पर मोटे तौर पर किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे।

जानिए क्या है आरसीईपी

रीजनल कंम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) कई देशों के बीच होने वाला एक मुक्त व्यापार समझौता है। जिसमें आसियान और एशिया के देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत की विकासशील देशों की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को एक दूसरे के विकास में सहायक बनाना है। इस समझौते में आसियान देशों के अलावा चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। इन देशों के बीच में एक मुक्त व्यापार समझौता होने वाला है जिसके बाद इन देशों के बीच बिना आयात शुल्क दिए व्यापार किया जा सकेगा। हालांकि यह समझौता अभी तक पूरी तरह से अमल में नहीं लाया जा सका है। आसियान देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलयेशिया, म्यांमार, फिलिपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। 

घरेलू उत्पादकों पर होगा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे घरेलू उत्पादकों पर बुरा असर पड़ेगा। निर्यात के मुकाबले आयात बढ़ने से असंतुलन पैदा होगा, जिसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि इस भागीदारी में भारत को अन्य देशों का बड़ा बाजार हासिल होता है, लेकिन उसका लाभ उठाने के लिए हमें अपना निर्यात बढ़ाने पर जोर देना होगा। दूध उत्पादकों ने समझौते पर काफी नाराजगी जाहिर की है। देश भर के कई किसानों ने आरसीईपी समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। 

स्टील उद्योग पर भी पड़ेगा असर

समझौते के बाद भारत की कंपनियों को एक बड़ा बाजार मिलेगा। साथ ही दूसरे देशों की कंपनियों को भी भारत जैसा बड़ा बाजार मिलेगा। इसलिए ऐसे में चीन समेत सभी दूसरे देश सस्ती कीमतों पर अपना सामान भारतीय बाजार में बेचना शुरू कर देंगे। स्टील उद्योग पर भी इसका असर पड़ने का आसार है।  

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