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Gujarat: 200 करोड़ की संपत्ति दान कर संन्यास लेंगे गुजरात के कारोबारी; फोन, एसी, पंखा सब छोड़ करेंगे भिक्षाटन

Sat, 13 Apr 2024 01:27 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Gujarat: साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर में धूमधाम से चार किलोमीटर लंबी एक शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान संन्यास ग्रहण करने जा रहे भावेश भाई भंडारी और उनकी पत्नी ने अपनी 200 करोड़ रुपये की संपत्ति दान में दे दी। उन्होंने अचानक कारोबारी से दीक्षार्थी बनने का फैसला किया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : i-stock
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विस्तार
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गुजरात के साबरकांठा जिले का एक कारोबारी परिवार सुर्खियों में है। दरअसल हिम्मतनगर के रहने वाले बिजनेसमैन भावेश भाई भंडारी और उनकी पत्नी ने अपनी 200 करोड़ की संपत्ति दान कर संन्यास लेने का फैसला किया है। उनके इस फैसले की खूब चर्चा हो रही है। भावेश भाई को जाननेवालों का मानना है कि भंडारी के परिवार का हमेशा से जैन समाज की ओर झुकाव रहा है। अक्सर इनके परिवार की मुलाकात दीक्षार्थियों और गुरुजनों से होती रहती थी। 

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बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के कारोबार से जुड़े हैं भावेश
भावेश भाई और उनकी पत्नी ने अपनी एशो-आराम की जिंदगी त्यागकर जैन धर्म की दीक्षा लेने और संन्यासी जीवन बिताने का फैसला किया है। भावेश बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के बिजनेस से जुड़े हुए हैं। उनका कारोबार साबरकांठा से अहमदाबाद तक फैला हुआ है।

शोभायात्रा में भावेश ने दान कर दी 200 करोड़ की संपत्ति 
साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर में धूमधाम से चार किलोमीटर लंबी एक शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान संन्यास ग्रहण करने जा रहे भावेश भाई भंडारी और उनकी पत्नी ने अपनी 200 करोड़ रुपये की संपत्ति दान में दे दी। उन्होंने अचानक कारोबारी से दीक्षार्थी बनने का फैसला किया है। जानकारी के अनुसार 22 अप्रैल को भावेश भाई और उनकी पत्नी समेत 35 लोग हिम्मतनगर रिवर फ्रंट पर संयमित जीवन जीने का संकल्प लेंगे।  
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पंखा, एसी और मोबाइल जैसी सुविधाएं त्यागनी होगी
संन्यास ग्रहण करने के बाद भावेश भाई और उनकी पत्नी को संयमित दिनचर्या का पालन करना होगा। वे जीवन भर भिक्षा मांगकर गुजारा करेंगे। इतना ही नहीं उनको पंखा, एसी, मोबाइल फोन जैसी सुख-सुविधाएं भी त्यागनी पड़ेगी। वे जहां कहीं भी यात्रा करेंगे उन्हें नंगे पांव चलना होगा।

बेटा-बेटी दो वर्ष पहले ही शुरू कर चुके हैं संयमित जीवन जीना
संन्यास लेने जा रहे भावेश भाई भंडारी और उनकी पत्नी से पहले उनके बच्चे (बेटा-बेटी) भी संयमित जीवन जीना शुरू कर चुके हैं। भावेश के 16 साल के बेटे और 19 साल की बेटी दो साल पहले ही जैन समाज की दीक्षा ले चुके हैं। अपने बच्चों से प्रेरित होकर ही भावेश भाई और उनकी पत्नी ने दीक्षा लेने का फैसला किया है।

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