जाम लगने से ड्रमंडगंज में ट्रकों की लगी लंबी कतार।
कोरोनावायरस के बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार ने पूरे देशभर में लॉकडाउन कर दिया है। 21 दिनों के लॉकडाउन में दो दिन हो चुके हैं। ऐसे में जरूरी चीजों की लिए सप्लाई चैन एक बड़ी चुनौती बन कर सामने आ रही है। ट्रक ड्राइवर वाहनों को हाईवे पर ही छोड़ कर वापस घर जा रहे हैं। निर्माताओं के पास स्टॉक खत्म हो रहे हैं और ई-ट्रैलर्स के डिलीवरी एजेंट पुलिस उत्पीड़न के डर से बाहर निकलने के लिए मना कर रहे हैं। ऐसे में यह सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी के सदस्यों ने कहा कि माल ढोने वाले ट्रकों को हाईवे टोल से छूट देने से कुछ खास फर्क नहीं पड़ा है। केंद्र सरकार के इस फैसले से बहुत कम फर्क पड़ा है, क्योंकि ड्राइवर और हेल्पर्स ने लंबे समय तक लगने वाले लॉगजैम की आशंका को देखते हुए वाहनों को छोड़ना शुरू कर दिया था।
वहीं, इस पूरे मामले पर अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस के अध्यक्ष बाल मलकीत सिंह ने कहा ट्रक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे थोक बाजार कृषि अब उत्पादों की कमी की चपेट में आ गई है। उन्होंने आगे कहा, "ड्राइवरों ने ट्रकों को छोड़ना शुरू कर दिया है और अब ये वापस अपने घरों की तरफ लौटने लगे हैं, भले ही जहां से वो आते वहां से इनकी दूरी 200-300 किलोमीटर दूर ही क्यों न हो। हम केंद्र से अनुरोध करते हैं कि वह राज्यों, विशेष रूप से कलेक्टरों से हमारे फंसे हुए ड्राइवरों को भोजन और पानी की आपूर्ति करने के लिए कहें।"
ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है, "हम भी लॉकडाउन में हैं, वरना हम अपने ड्राइवरों के लिए उचित व्यवस्था करते।" एसोसिएशन का अनुमान है कि राजमार्गों पर लगभग 30 लाख ट्रक फंसे हुए हैं। वहीं, FMCG सेक्टर में, ब्रिटानिया के सीईओ वरुण बेरी ने इस बात का खतरा जताया है कि पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री का स्टॉक एक हफ्ते से 10 दिनों के भीतर खत्म हो जाएगा, अगर सप्लाई चेन तुरंत सामान्य नहीं हुई तो।