अदाणी समूह ने महाराष्ट्र के तटीय कोंकण क्षेत्र में दिघी बंदरगाह परियोजना में 42,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने पर हामी भरी है। सरकारी अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि समूह की प्रमुख इकाई अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) की ओर से संचालित दिघी पोर्ट्स ने बंदरगाह के विस्तार और संबंधित गतिविधियों के लिए 42,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इससे पहले भारत समुद्री सप्ताह के दौरान महाराष्ट्र में बंदरगाहों के विकास से संबंधित तीन सत्र आयोजित किए गए। इन तीन सत्रों में से एक सत्र महाराष्ट्र सरकार और विभिन्न कंपनियों के बीच 15 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर का था। ये समझौता ज्ञापन जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत, बंदरगाह अवसंरचना और जल परिवहन के विकास से संबंधित थे।
सबसे बड़ा समझौता ज्ञापन अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एसईजेड) के साथ हस्ताक्षरित किया गया, जिसका मूल्य 42,500 करोड़ रुपये है, जो जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत में भागीदारी करेगा। दूसरा समझौता ज्ञापन जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बंदरगाह अवसंरचना में सुधार और वैश्विक मानकों के अनुरूप सुधार के लिए हस्ताक्षरित किया गया। आईआईटी बॉम्बे के साथ तीन प्रमुख समझौता ज्ञापनों पर अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना के निर्माण, समुद्री क्षेत्र में कौशल विकास और जहाज निर्माण के लिए एक मंच तैयार करने हेतु हस्ताक्षर किए गए। अन्य दो समझौता ज्ञापन श्रमिक वर्ग के क्षमता निर्माण और कौशल उन्नयन के लिए क्लस्टर-आधारित उत्कृष्टता केंद्र बनाने पर केंद्रित थे। आईआईटी बॉम्बे एक पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करेगा।
कार्यक्रम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "इन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करना महाराष्ट्र सरकार के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि इससे महाराष्ट्र में 56,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। उन्होंने कहा कि ये समझौता ज्ञापन रणनीतिक हैं जो हमें प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने, उत्कृष्टता केंद्रों के निर्माण और तीव्र डिजिटलीकरण में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि इन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने से महाराष्ट्र को समुद्री क्षेत्र में एक महाशक्ति बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।" फडणवीस ने बताया कि बंदरगाहों और उनकी सुविधाओं के विस्तार से एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलेगी। यह बंदरगाह-आधारित विकास, विनिर्माण और नए उद्योगों के लिए एक नया आकर्षण होगा।