देश का निजी क्षेत्र एक दशक पहले की तुलना में अब निवेश करने की बेहतर स्थिति में है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, निजी कंपनियों की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे उन्हें नए निवेश करने में आसानी होगी।
देश का निजी क्षेत्र एक दशक पहले की तुलना में अब निवेश करने की बेहतर स्थिति में है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, निजी कंपनियों की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे उन्हें नए निवेश करने में आसानी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, निजी कंपनियों ने कुछ वर्षों में कर्ज लगातार कम किया है।
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इससे उनका खाता-बही मजबूत हुआ है। यह कम पूंजीगत खर्च, बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल, नए शेयर जारी करने और बेहतर क्षमता उपयोग के कारण हुआ है। कंपनियों के कर्ज की तुलना में नेटवर्थ अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह वित्त वर्ष 2015 में 1.05 गुना से घटकर 2025 में अनुमानित 0.50 गुना हो गया है। इससे कंपनियों के पास विस्तार के लिए नया कर्ज लेने के लिए पर्याप्त गुंजाइश है।
एनपीए घटने से कर्ज मिलने में सुविधा
बैंकों का एनपीए घटने से उद्योगों को कर्ज मिलने में सुविधा हो रही है। 2017 से 2021 के बीच सरकारी बैंकों के 3.3 लाख करोड़ से अधिक के पुनर्पूंजीकरण से उन्हें खाता-बही को साफ करने और पूंजीगत ताकत में सुधार करने में मदद मिली है। बैंकों का सकल एनपीए मार्च, 2018 के 11.2 फीसदी से घटकर मार्च, 2025 में 2.5 फीसदी रह गया है।
सरकारी नीतियों से मिल रहा प्रोत्साहन
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी नीतियों ने भी निजी निवेश को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना, मेक इन इंडिया पहल, एफडीआई नीतियों, कॉरपोरेट कर में कटौती, बुनियादी ढांचे का विकास और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे ने निवेश के माहौल को बेहतर बनाने में योगदान दिया है। मांग में वृद्धि के कारण निजी खपत की वृदि्ध दर वित्त वर्ष 2024 में 5.6 फीसदी रही, जिसके 2025 में 7.6 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।