केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन के लिए गठित आठवें वेतन आयोग ने अपनी 18-सूत्रीय प्रश्नावली पर सुझाव और प्रतिक्रियाएं जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। जहां एक ओर आयोग ने विभिन्न हितधारकों को अपनी राय रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (आईआरटीएसए) ने आयोग को पत्र लिखकर प्रश्नावली में कई महत्वपूर्ण बदलावों और भत्तों व पेंशन से जुड़े नए विषयों को शामिल करने की पुरजोर मांग की है।
डेडलाइन बढ़ने के बीच, आईआरटीएसए के महासचिव केवी रमेश ने आठवें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना देसाई को लिखे पत्र में प्रश्नावली के वर्तमान स्वरूप को अपर्याप्त बताया है। रेलवे यूनियन की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
आईआरटीएसए ने 'कैरियर प्रोग्रेसन' के मुद्दे पर भी विशेष ध्यान आकर्षित किया है। यूनियन का कहना है कि प्रश्नावली में केवल 'मोडिफाइड एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेसन स्कीम' का जिक्र है, जबकि मुख्य फोकस कार्यात्मक पदोन्नति पर होना चाहिए।
इसके अलावा, डिजिटल सुझाव प्रस्तुत करने के लिए तय की गई तकनीकी सीमाओं पर भी आपत्ति जताई गई है। यूनियन ने नौ विषयों के लिए निर्धारित 3500 शब्दों की सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने और अटैचमेंट के आकार पर लगी पाबंदी खत्म करने की मांग की है। साथ ही, ऑनलाइन सबमिशन के अलावा यूनियनों को भौतिक रूप से भी ज्ञापन सौंपने की अनुमति देने का आग्रह किया गया है।
आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों को वेतन वृद्धि और सुविधाओं से बड़ी उम्मीदें हैं। रेलवे यूनियन आईआरटीएसए) की ओर से उठाई गई मांगें इस बात का संकेत देते हैं कि कर्मचारी संगठन इस पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समावेशी और व्यावहारिक बनाना चाहते हैं। 31 मार्च तक सुझावों के संकलन के बाद, आयोग की ओर से इस दिशा में उठाए जाने वाले कदम देश के केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य का आर्थिक ढांचा तय करेंगे।