देश में प्याज की किल्लत से आसमान छू रही कीमतों पर जल्द ही लगाम कसने की उम्मीद है। विदेश से 790 टन प्याज की पहली खेप भारत पहुंच गई है और सरकार ने दिल्ली व आंध्र प्रदेश में इसकी आपूर्ति शुरू हो गई है। उपभोक्ता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि प्याज के बंदरगाह पर उतरने की लागत 57-60 रुपये किलो आई है। इसी लागत पर राज्यों को इसकी आपूर्ति की जाएगी।
व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगले साल जनवरी के अंत तक प्याज की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। उसके बाद खरीफ फसल की आवक होने पर दाम नीचे आएंगे। 2019-20 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) में खरीफ का उत्पादन 25 फीसदी कम रहने का अनुमान है। ऐसा प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून की देरी और अत्यधिक बारिश की वजह से हुआ है। इससे पहले 2015-16 में भी देश में दो हजार टन प्याज का आयात करना पड़ा था।