एक वैश्विक सर्वेक्षण में दुनियाभर के 73 प्रतिशत सीईओ ने इस बात पर सहमती जताई है कि वैश्विक आर्थिक विकास में अगले 12 महीनों में गिरावट की आशंका है। विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के पहले दिन सोमवार को वार्षिक सर्वेक्षण जारी करते हुए पीडब्ल्यूसी ने कहा कि यह 2021 और 2022 के आशावादी दृष्टिकोण की तुलना में एक बड़ा बदलाव होगा। इन वर्षों में दो-तिहाई से अधिक कंपनियों के सीईओ ने आर्थिक विकास में सुधार उम्मीद जतायी थी।
12 साल पहले पीडब्ल्यूसी ने जब से यह सर्वे शुरू किया था तब से वैश्विक आर्थिक विकास पर विभिन्न कंपनियों के सीईओ की ओर से दिए गए ये सबसे निराशावादी विचार हैं। सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि लगभग 40 प्रतिशत सीईओ को यह भी भरोसा नहीं है कि अगर वे अपनी कंपनियों में बदलाव नहीं करेंगे तो 10 वर्षों में आर्थिक रूप से वे व्यवहार्य रहेंगे या नहीं।
यह सोचना जल्दबाजी कि भारत वैश्विक आर्थिक विकास को प्रभावित करने में चीन की जगह ले लेगा ः राजन
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने दावोस में एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि यह सोचना जल्दबाजी होगी कि वैश्विक आर्थिक विकास को प्रभावित करने के मामले में भारत चीन की जगह ले लेगा। हालांकि उन्हाेंने इस बात से इनकार भी नहीं किया और कहा कि भविष्य में चीजें बदल सकती हैं क्योंकि भारत पहले से ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह बढ़ रहा है और विस्तार जारी रखने की क्षमता रखता है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) से संबंधित एक प्रेस ब्रीफिंग में राजन ने कहा कि उनमें से अधिकांश को 2023 में वैश्विक मंदी की उम्मीद थी। राजन ने कहा कि चीनी अर्थव्यवस्था में कोई भी सुधार निश्चित रूप से वैश्विक विकास की संभावनाओं को बढ़ावा देगा।