सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लगातार जुड़े रहने के बावजूद 35% भारतीय सिंगल्स अकेलापन महसूस करते हैं। काम, पढ़ाई और करियर का दबाव उनके सामाजिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। वहीं, युवा डेटिंग में सुरक्षा और समावेशिता को लेकर सतर्क हैं और कम लेकिन मजबूत दोस्ती के साथ गहरे, गंभीर व लॉन्ग-टर्म रिश्तों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आज का युवा भले ही चौबीसों घंटे इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिये दुनिया से जुड़ा हो, लेकिन असल जिंदगी में वह गहरे अकेलेपन का शिकार है। मैच ग्रुप और इप्सोस के सर्वे में भारतीय युवाओं को लेकर एक चौंकाने वाला विरोधाभास (कनेक्शन पैराडॉक्स) सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 35% भारतीय सिंगल्स अकेलापन महसूस करते हैं। युवाओं का कहना है कि डिजिटल दुनिया में कदम रखते ही सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हैं और कम लेकिन मजबूत दोस्त बनाना चाहते हैं।
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ऑनलाइन कनेक्शन, लेकिन असल जिंदगी में अकेलापन
युवाओं ने माना, वे ऑनलाइन तो लोगों से जुड़े रहते हैं, लेकिन असल में खुद को अकेला पाते हैं। इसकी बड़ी वजह काम का दबाव और करियर की चिंता है। युवा सामाजिक जीवन से ज्यादा काम व पढ़ाई को तवज्जो दे रहे हैं। 55% युवाओं का कहना है कि दिनभर की भागदौड़ के बाद वे इतने थक जाते हैं कि किसी से मिलने-जुलने की हिम्मत नहीं बचती।
गंभीर और गहरे रिश्तों की तलाश में युवा
भारतीय युवा अब औपचारिक डेटिंग के बजाय गहरे और गंभीर रिश्तों की तलाश में हैं। 85% युवा लॉन्ग-टर्म रिश्ते चाहते हैं। जेन जी में यह आंकड़ा 89% है। 40% युवाओं को 'सच्चे प्यार' पर अटूट विश्वास है और डेटिंग एप का इस्तेमाल कर रहे। यह सर्वे 1,000 युवाओं से बातचीत पर आधारित है।
64 प्रतिशत : सिंगल्स दे रहे काम या पढ़ाई को तवज्जो।