प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) खातों के कुल 56.04 करोड़ खातों में से 23 प्रतिशत निष्क्रिय हो चुके हैं। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई 2025 के अंत तक 13.04 करोड़ पीएमजेडीवाई खाते निष्क्रिय हो गए हैं।
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इन राज्यों में सबसे अधिक निष्क्रिय खाते
इसमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 2.75 करोड़ जनधन खाते निष्क्रिय हैं, जिसके बाद बिहार में 1.39 करोड़ और मध्य प्रदेश में 1.07 करोड़ खाते निष्क्रिय हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 18 फरवरी, 2009 के दिशानिर्देशों के अनुसार, अगर किसी बचत खाते में दो वर्ष से अधिक समय तक कोई लेनदेन नहीं हुआ तो उसे निष्क्रिय माना लिया जाता है।
सरकार ने पीएमजेडीवाई खातों के लिए उठाए कई कदम
सरकार ने पीएमजेडीवाई खातों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) सहित कई कदम उठाए हैं। ये लाभ निष्क्रिय खातों में भी हस्तांतरित किए जाते हैं। चौधरी ने बताया कि हाल ही में 1 जुलाई, 2025 से 30 सिंतबर, 2025 तक पूरे देश में ग्राम पंचायत स्तर पर अभियान शुरू किया गया है। इसमें 'निष्क्रिय पीएमजेडीवाई खातों' का दोबारा केवाईसी अभियान की प्रमुख गतिविधियों में से एक है।
मंत्री ने कहा कि बैंक खाताधारकों को पत्र, ईमेल या एसएमएस के माध्यम से उन खातों के बारे में लिखित रूप से सूचित करते हैं जो निष्क्रिय हो जाते हैं और निष्क्रिय खातों के धारकों से तिमाही आधार पर पत्र, ईमेल या एसएमएस के माध्यम से संपर्क भी करते हैं।
यूपीआई लेनदेन पर शुल्क का कोई प्रस्ताव नहीं
उन्होंने आगे बताया कि फिलहाल यूपीआई पर लेनदेन शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पारिस्थितिकी तंत्र भागीदारों द्वारा यूपीआई सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने पिछले चार वर्षों यानी वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान प्रोत्साहन योजना लागू की थी। इस अवधि के दौरान, सरकार ने लगभग 8,730 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन समर्थन बढ़ाया है।